Congress Rally: बाड़मेर-बालोतरा जिलों के भूगोल बदलने के विरोध में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली: डोटासरा ने BJP को बताया तानाशाह

Congress Rally - बाड़मेर-बालोतरा जिलों के भूगोल बदलने के विरोध में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली: डोटासरा ने BJP को बताया तानाशाह
| Updated on: 14-Jan-2026 07:34 PM IST
बाड़मेर और बालोतरा जिलों के प्रस्तावित भौगोलिक परिवर्तनों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने धोरीमन्ना में एक विशाल जन आक्रोश रैली का आयोजन किया। यह रैली उन हजारों नागरिकों की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बुलाई गई थी जो इन प्रशासनिक निर्णयों से सीधे प्रभावित हो रहे हैं और इस आयोजन में भाग लेने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग धोरीमन्ना पहुंचे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह मुद्दा स्थानीय आबादी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। रैली का मुख्य उद्देश्य सरकार के इस कदम के खिलाफ एकजुटता दिखाना और अपनी मांगों को मजबूती से रखना था। इस रैली ने स्थानीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है और सरकार पर दबाव बनाने का काम किया है।

यातायात में व्यवधान और जनभावना का प्रदर्शन

रैली में उमड़ी भीड़ इतनी विशाल थी कि बाड़मेर-सांचौर नेशनल हाईवे पर यातायात को डायवर्ट करना पड़ा और यह स्थिति रैली की व्यापकता और जनता के उत्साह को दर्शाती है। इस दौरान, एक महत्वपूर्ण घटना घटी जब एक एम्बुलेंस भीड़ में फंस गई। हालांकि, वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवीयता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस को रास्ता दिया और उसे सुरक्षित निकालने में मदद की। यह घटना न केवल जन आक्रोश के बीच मानवीय मूल्यों की उपस्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि विरोध प्रदर्शन के बावजूद, जनता में सहयोग और संवेदनशीलता बनी हुई है और यातायात का डायवर्जन और एम्बुलेंस की घटना दोनों ही इस रैली के बड़े पैमाने पर होने और इसके सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करते हैं।

हेमाराम चौधरी का लगातार धरना और कांग्रेस का समर्थन

धोरीमन्ना में पिछले 11 दिनों से कांग्रेस के कद्दावर नेता हेमाराम चौधरी इन दोनों जिलों के भूगोल बदलने के विरोध में धरने पर बैठे हैं। उनकी यह तपस्या और दृढ़ता स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कांग्रेस के शीर्ष नेता, जिनमें गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट, टीकाराम जूली और हरीश चौधरी शामिल थे, उनके समर्थन में इस जन आक्रोश रैली में पहुंचे और इन नेताओं की उपस्थिति ने हेमाराम चौधरी के आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और यह संदेश दिया कि पार्टी इस मुद्दे पर उनके साथ मजबूती से खड़ी है। हेमाराम चौधरी का धरना इस पूरे आंदोलन का केंद्र बिंदु बना हुआ है, और उनके अडिग रुख ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।

डोटासरा का सत्ताधारी दल पर कड़ा प्रहार

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने संबोधन में सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये लोग परिसीमन और SIR (स्टेट इन्वेस्टमेंट रीजन) के नाम पर 'दादागिरी' कर रहे हैं। डोटासरा ने भाजपा को 'तानाशाह' और 'बहरूपिया' करार देते हुए जनता से। आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में उन्हें 'मोरिया बुलाने' का आह्वान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि परसों अमित शाह आए थे और भाजपा नेताओं को धमकाते रहे, उन्हें हर विधानसभा में आपत्ति लगाने और कांग्रेस को वोट देने वाले 10 से 15 हजार वोटर के नाम कटवाने के लिए कहा और डोटासरा ने जनता से इन तानाशाहों के सामने न झुकने और मन की लड़ाई लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई केवल गुड़ामालानी और धोरीमन्ना की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की लड़ाई है। उन्होंने हेमाराम चौधरी को 'युवा टाइगर' कहकर उनकी प्रशंसा की और उनके संघर्ष को सराहा।

जूली की राजनीतिक परिणामों पर चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी अपने भाषण में भाजपा सरकार को चेतावनी दी और उन्होंने कहा कि 'इस पर्ची के चक्कर में मत रहिए, पर्ची के चक्कर में कुर्सी चली जाएगी। ' जूली का इशारा संभवतः किसी बाहरी शक्ति या केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राज्य के मामलों में हस्तक्षेप की ओर था। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में राजस्थान की जनता इस सरकार का 'इलाज करने का काम करेगी' और जूली ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने 'उद्योगपति मित्रों' को बाड़मेर और जैसलमेर में केवल जमीन देने का काम किया है, जिससे आम जनता के हितों की अनदेखी हुई है। यह बयान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है और उसके इरादों पर संदेह पैदा करता है।

पायलट का कांग्रेस के लिए दृष्टिकोण और विधानसभा में कार्रवाई

सचिन पायलट ने अपने संबोधन में हेमाराम चौधरी के संघर्ष का समर्थन किया और उनकी दूरदर्शिता की सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस की सरकार थी और पंचायतों का परिसीमन हो रहा था, तब हेमाराम चौधरी ने 500 आबादी का सुझाव दिया था, जो लोगों को जोड़ने की उनकी इच्छा को दर्शाता है। पायलट ने विश्वास व्यक्त किया कि '35 महीने में राजस्थान में कांग्रेस का राज आने वाला है। ' उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विधानसभा में इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाया जाएगा और मुख्यमंत्री को इस पर जवाब देना पड़ेगा। पायलट के बयान ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा और भविष्य में कांग्रेस की वापसी की उम्मीद जगाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी इस महत्वपूर्ण मुद्दे। को किसी भी मंच पर उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान धक्का-मुक्की

रैली के समापन के बाद, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी। के नेतृत्व में कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपने पहुंचे। इस दौरान, पुलिस और युवाओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की हो गई। यह घटना प्रदर्शनकारियों के उत्साह और प्रशासन के बीच संभावित तनाव को दर्शाती है। हालांकि, स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन यह। दिखाता है कि इस मुद्दे पर जनता का आक्रोश कितना गहरा है। ज्ञापन सौंपना लोकतांत्रिक विरोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इस दौरान हुई यह घटना आंदोलन की तीव्रता को उजागर करती है और

हेमाराम चौधरी का अडिग रुख और जनमत का सम्मान

सभी प्रमुख नेताओं के भाषण समाप्त होने के बाद, गोविंद सिंह डोटासरा और सचिन पायलट सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने हेमाराम चौधरी से धरना समाप्त करने का निवेदन किया। हालांकि, हेमाराम चौधरी ने तुरंत धरना समाप्त करने का फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'धरना जनता ने दिया है, मैं जनता से पूछूंगा। जैसा जनता का फैसला होगा, उसके आधार पर मैं फैसला लूंगा। ' यह बयान उनकी लोकतांत्रिक भावना और जनता के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डोटासरा ने हेमाराम चौधरी की निस्वार्थ भावना की तुलना उन नेताओं से की जो 'कुटिल मुस्कान के साथ आपका तिरस्कार कर रहे हैं', जिससे यह फर्क स्पष्ट होता है कि कौन जनता के हित में काम कर रहा है। हेमाराम चौधरी का यह रुख उनके आंदोलन को और अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है।

हरीश चौधरी के धोखे के आरोप

हरीश चौधरी ने भी अपने संबोधन में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 'बैक डेट में ऐसा खेला खेला जा रहा है और जनता के साथ धोखा किया जा रहा है। ' उन्होंने इस बात पर अविश्वास व्यक्त किया और एक अधिकारी को फोन करके पूछा, तो उन्हें दिल्ली की तरह जवाब मिला कि 'कुछ तो चल रहा है। ' यह बयान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाता है। हरीश चौधरी के इन आरोपों ने इस पूरे मामले में एक और परत जोड़ दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस नेता इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं और वे सरकार के फैसलों के पीछे के संभावित छिपे हुए एजेंडे को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

पूरे प्रदेश की लड़ाई का आह्वान

कांग्रेस नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि बाड़मेर और बालोतरा जिलों। के भूगोल को बदलने का यह मुद्दा केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश की लड़ाई है। गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह संघर्ष केवल गुड़ामालानी और धोरीमन्ना तक सीमित। नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के हर उस नागरिक के लिए है जो सरकार की 'तानाशाही' और 'दादागिरी' से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने जनता से एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ खड़े होने और आगामी चुनावों में भाजपा को सबक सिखाने का आह्वान किया। यह रैली कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन थी, जिसने न केवल सरकार के खिलाफ जन आक्रोश को सामने लाया, बल्कि पार्टी के भीतर एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति का भी संकेत दिया। नेताओं ने जनता को भरोसा दिलाया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह आंदोलन आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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