लोकसभा में टूटा DMK कांग्रेस का साथ, स्टालिन के सांसदों को मिली अलग सीटिंग

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लोकसभा में टूटा DMK कांग्रेस का साथ, स्टालिन के सांसदों को मिली अलग सीटिंग
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संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच की दूरियां अब आधिकारिक तौर पर बढ़ गई हैं। एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, DMK के सांसदों को अब लोकसभा में कांग्रेस के सांसदों से अलग बैठने की अनुमति दे दी गई है। पहले ये दोनों पार्टियां एक-दूसरे की प्रमुख सहयोगी थीं और सदन में साथ बैठती थीं, लेकिन अब तमिलनाडु की बदलती राजनीति ने इनके रिश्तों में दरार पैदा कर दी है। DMK ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके सांसद अब कांग्रेस के सांसदों के बगल में नहीं बैठेंगे, जिसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी अलग बैठने की मांग को मंजूरी दे दी है।

सीटिंग अरेंजमेंट में बदलाव की मांग

बैठने की व्यवस्था में इस बदलाव की शुरुआत DMK नेता कनिमोझी करुणानिधि के एक पत्र से हुई थी। कनिमोझी ने बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखा था और इस पत्र में उन्होंने अनुरोध किया था कि DMK सांसदों के बैठने के स्थान को कांग्रेस सांसदों से अलग किया जाए। पार्टी का मानना है कि अब उनके और कांग्रेस के बीच वह पुराना तालमेल नहीं रहा है, इसलिए सदन के भीतर भी उनकी पहचान अलग होनी चाहिए और गुरुवार शाम को पार्टी ने इस बात की पुष्टि की कि उनकी इस मांग को स्वीकार कर लिया गया है।

गठबंधन टूटने की मुख्य वजह

DMK और कांग्रेस के बीच इस कड़वाहट की मुख्य जड़ तमिलनाडु में नई सरकार का गठन है। दरअसल, कांग्रेस ने DMK के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, चुनाव के बाद जब राज्य में नई सरकार बनाने की बारी आई, तो कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK का समर्थन कर दिया और उनके साथ सरकार में शामिल हो गई। कांग्रेस के इस कदम को DMK ने अपने साथ विश्वासघात माना है और dMK के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "पीठ में छुरा घोंपना" और "धोखाधड़ी" करार दिया है।

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने केवल 5 सीटें जीती थीं, लेकिन इसके बावजूद उसने TVK के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया। DMK नेतृत्व, विशेषकर मुख्यमंत्री MK स्टालिन, इस फैसले से काफी नाराज हैं। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस ने गठबंधन के धर्म का पालन नहीं किया और अपने निजी स्वार्थ के लिए TVK का हाथ थाम लिया। इसी नाराजगी के चलते DMK ने अब कांग्रेस से पूरी तरह दूरी बनाने का मन बना लिया है और साफ कर दिया है कि वे अब किसी भी स्तर पर कांग्रेस के साथ नहीं दिखना चाहते।

इंडिया ब्लॉक से भी बनाई दूरी

इस विवाद का असर केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को भी प्रभावित किया है। DMK ने घोषणा की है कि वह 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होगी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अब वह इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है। DMK के वरिष्ठ नेता TKS इलांगोवन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चूंकि हम अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं रहे हैं, इसलिए 8 जून की बैठक में हमारे शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

कांग्रेस की सफाई और 2014 का जिक्र

दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने इस कदम का बचाव किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजनीति में समीकरण समय के साथ बदलते रहते हैं। उन्होंने DMK को याद दिलाया कि 2014 के चुनावों में DMK ने भी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह राज्य के हित में लिया गया निर्णय है। हालांकि, कांग्रेस के इस फैसले ने तमिलनाडु में दशकों पुरानी DMK-कांग्रेस की साझेदारी को लगभग खत्म कर दिया है, जिसका असर अब देश की संसद में भी साफ दिखाई दे रहा है।

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