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: डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी: 'अभी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई', शांति प्रस्ताव पर जताया संदेह

- डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी: 'अभी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई', शांति प्रस्ताव पर जताया संदेह
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि तेहरान ने अब तक अपने कृत्यों की पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान की ओर से आने वाले किसी भी नए शांति प्रस्ताव को स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल होगा और उन्होंने कहा कि वह जिस प्रस्ताव की समीक्षा करने वाले हैं, उसके स्वीकार्य होने की संभावना उन्हें नजर नहीं आती। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक और सैन्य तनाव और अधिक गहराने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान का 14 सूत्री प्रस्ताव और ट्रंप का संदेह

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को जानकारी दी कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा भेजे गए एक नए प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसके सफल होने पर गहरा संदेह जताया। ईरान के सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी अर्ध-सरकारी 'नूर न्यूज एजेंसी' के अनुसार, ईरान ने एक 14 सूत्री प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में केवल युद्धविराम की अवधि बढ़ाने के बजाय युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया गया है और यह प्रस्ताव अमेरिका की नौ सूत्री योजना के जवाब में तैयार किया गया है।

प्रस्ताव की मुख्य शर्तें और पाकिस्तानी मध्यस्थता

ईरान द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस जवाब में कई कड़ी शर्तें रखी गई हैं। पाकिस्तान ने इस दौरान ईरान और अमेरिका के बीच पहली सीधी वार्ता की मेजबानी की है।

ओमान की भूमिका और होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद

राजनयिक स्तर पर हलचल तेज करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से चर्चा की। ओमान इससे पहले भी अमेरिका-ईरान वार्ता में पर्यवेक्षक की भूमिका निभा चुका है। दूसरी ओर, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की एक नई योजना पेश की है, जो वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा नियंत्रित करता है। हालांकि, ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।

IRGC की प्रतिक्रिया और भविष्य की स्थिति

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और iRGC का कहना है कि अमेरिका के पास अब फैसले लेने की गुंजाइश काफी सीमित रह गई है। अली निकजाद ने जोर देकर कहा कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' इस्लामिक गणराज्य ईरान का हिस्सा है और वे युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए काम कर रहा है और ट्रंप की नाकेबंदी की योजना विफल साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बयानों से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।

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