जब भी बाजार में सोने या चांदी के भाव अचानक ऊपर-नीचे होते हैं, तो आम आदमी से लेकर बड़े निवेशक तक हैरान रह जाते हैं और आखिर इन कीमतों के पीछे का असली खेल क्या है? इसी उतार-चढ़ाव को समझने के लिए विशेषज्ञ एक खास पैमाने का इस्तेमाल करते हैं, जिसे 'गोल्ड-सिल्वर रेशिओ' कहा जाता है। यह रेशिओ न केवल कीमतों की तुलना करता है, बल्कि यह भी बताता है कि भविष्य में किस धातु में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
क्या होता है गोल्ड-सिल्वर रेशिओ?
आसान शब्दों में कहें तो गोल्ड-सिल्वर रेशिओ यह बताता है कि एक औंस या एक ग्राम सोना खरीदने के लिए आपको कितनी चांदी की जरूरत होगी और यह कोई जटिल गणित नहीं है, बल्कि दोनों कीमती धातुओं की सापेक्ष कीमत का एक आईना है। अगर यह रेशिओ बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है। इसके विपरीत, यदि रेशिओ गिरता है, तो चांदी सोने के मुकाबले अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
इसे निकालने का तरीका क्या है?
इस रेशिओ को निकालने के लिए सोने की वर्तमान कीमत को चांदी की वर्तमान कीमत से विभाजित (Divide) किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि सोने की कीमत 75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है और चांदी 90,000 रुपये प्रति किलो (यानी 900 रुपये प्रति 10 ग्राम) है, तो रेशिओ लगभग 83 और 3 होगा। इसका मतलब है कि सोने का भाव चांदी से 83 गुना अधिक है। निवेशक इसी आंकड़े के आधार पर अपनी रणनीति तैयार करते हैं।
जब रेशिओ ज्यादा हो तो क्या होता है?
जब गोल्ड-सिल्वर रेशिओ ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर पहुंच जाता है, तो यह संकेत देता है कि सोना बहुत महंगा हो चुका है या चांदी बहुत सस्ती है। आमतौर पर आर्थिक मंदी, वैश्विक तनाव या अनिश्चितता के समय निवेशक सोने को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। इससे सोने की मांग बढ़ती है और रेशिओ ऊपर चला जाता है और अनुभवी निवेशक ऐसे समय में चांदी खरीदना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि भविष्य में चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और रेशिओ वापस नीचे आएगा।
कम रेशिओ के मायने क्या हैं?
जब यह रेशिओ नीचे आता है, तो इसका मतलब है कि चांदी का प्रदर्शन सोने से बेहतर है और चांदी का उपयोग केवल गहनों में ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही होती है, तब औद्योगिक मांग के कारण चांदी के दाम सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से भागते हैं। ऐसे में रेशिओ कम हो जाता है, जो आर्थिक मजबूती का संकेत माना जाता है।
निवेशकों के लिए यह क्यों जरूरी है?
गोल्ड-सिल्वर रेशिओ निवेशकों को 'पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग' में मदद करता है और यदि आप कीमती धातुओं में निवेश करते हैं, तो यह रेशिओ आपको बताता है कि कब आपको अपना सोना बेचकर चांदी लेनी चाहिए और कब चांदी बेचकर सोना। इसके अलावा, गोल्ड लोन लेने वालों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। बैंक और वित्तीय संस्थान सोने की मजबूती के आधार पर ही लोन की राशि तय करते हैं। यदि रेशिओ सोने के पक्ष में है, तो आपको अपने सोने पर बेहतर वैल्यू मिल सकती है।
ऐतिहासिक रुझान और भविष्य
इतिहास गवाह है कि गोल्ड-सिल्वर रेशिओ हमेशा एक दायरे में घूमता रहता है। जब भी यह अपने चरम पर पहुंचता है, बाजार में सुधार होता है और विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के निवेश के लिए इस रेशिओ पर नजर रखना किसी भी तकनीकी चार्ट को देखने से ज्यादा कारगर हो सकता है। यह बाजार की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझने का सबसे सरल और सटीक तरीका है।