भारत सरकार ने शेयर बाजार में निवेश करने वाले रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह साफ कर दिया है कि इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। 20 जुलाई को संसद की कार्यवाही के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। यह बयान उन अटकलों और मांगों के बीच आया है जिसमें बाजार के विशेषज्ञ और निवेशक मार्केट सेंटीमेंट को सुधारने और घरेलू निवेशकों को राहत देने के लिए इस टैक्स को हटाने की मांग कर रहे थे।
संसद में सरकार का आधिकारिक पक्ष
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से यह पूछा गया था कि क्या सरकार रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए LTCG टैक्स को समाप्त करने पर विचार कर रही है। इस सवाल के पीछे का तर्क यह था कि इससे बाजार की धारणा में सुधार होगा, घरेलू निवेशकों के हितों की रक्षा होगी और विदेशी निवेशकों के साथ भारतीय निवेशकों के लिए एक समान अवसर पैदा होंगे और इसके जवाब में मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव वर्तमान में सरकार के विचाराधीन नहीं है। उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि कैपिटल गेन्स की दरों सहित सभी टैक्स पॉलिसियों की समीक्षा एक नियमित प्रक्रिया है और यह समीक्षा सालाना बजट प्रक्रिया और कानूनी बदलावों के माध्यम से समय-समय पर की जाती है, जिसमें देश के व्यापक आर्थिक यानी मैक्रो-इकोनॉमिक पैमानों को पूरी तरह ध्यान में रखा जाता है।
LTCG टैक्स से सरकार की भारी कमाई
सरकार ने सदन में LTCG टैक्स के माध्यम से होने वाली कमाई के आंकड़े भी पेश किए, जो पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG कलेक्शन फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से संबंधित असेसमेंट ईयर 2024-25 में 72249 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। अगले वर्ष इसमें और भी बड़ी वृद्धि देखी गई। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2025-26 में यह कलेक्शन बढ़कर 129158 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यदि इन दो वर्षों के कुल आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने LTCG के माध्यम से कुल 2 लाख 1 हजार करोड़ रुपये जुटाए हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर 12 प्रतिशत 50 पैसे तय की गई है। यह टैक्स केवल तभी लागू होता है जब एक फाइनेंशियल ईयर में निवेशक का मुनाफा 1 लाख 25 हजार रुपये से अधिक हो जाता है। टैक्स कानूनों के तहत, यदि किसी एसेट को 12 महीने से अधिक समय तक अपने पास रखा जाता है, तो उसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट की श्रेणी में रखा जाता है।
सभी निवेशकों के लिए एक समान टैक्स व्यवस्था
बाजार में इस बात को लेकर भी चर्चा थी कि क्या विदेशी और घरेलू निवेशकों के लिए टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs), घरेलू संस्थागत निवेशकों और आम रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स की दर 12 प्रतिशत 50 पैसे ही है और इसमें कोई भेदभाव नहीं है। चौधरी ने सदन को बताया कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए जो दर तय है, वही FPIs के लिए भी लागू होती है और हालांकि, उन्होंने एक विशेष बदलाव का जिक्र किया जो इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से किया गया है। इस अध्यादेश के तहत सरकार ने केवल सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) में विदेशी निवेशकों द्वारा किए जाने वाले निवेश के नियमों को तर्कसंगत बनाया है। ऐसे विशिष्ट निवेशों से होने वाली ब्याज आय या कैपिटल गेन को इनकम टैक्स से छूट दी गई है, ताकि सरकारी ऋण पत्रों में विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पिछला बयान
इससे पहले मई के महीने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी टैक्स सिस्टम को लेकर निवेशकों की चिंताओं पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार स्टॉक मार्केट निवेशकों की टैक्स से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को सुनने के लिए हमेशा तैयार है। जब उनसे LTCG और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स की समीक्षा के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा था कि हम किसी भी मुद्दे पर जनता की राय और सुझावों पर विचार करने के लिए खुले हैं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि बाजार के हितधारकों द्वारा दिए गए सुझावों पर निश्चित रूप से गौर किया जाएगा। हालांकि, वर्तमान में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि टैक्स हटाने का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है और मौजूदा व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी।