मध्य प्रदेश सरकार में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी संतोष कुमार वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ब्राह्मण समुदाय की बेटियों को लेकर उनके द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस बुधवार देर रात सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया, जिसमें वर्मा के। बयान को भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं बताया गया है।
विवादास्पद बयान और उसका संदर्भ
यह पूरा मामला 23 नवंबर, 2025 को भोपाल में आयोजित अजाक्स (AJAKS) के प्रांतीय अधिवेशन से जुड़ा है। इस अधिवेशन के दौरान, अजाक्स के नए बने सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा। ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे प्रदेश में हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा था, "एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक मिलता रहना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान में न दे, या उससे संबंध न बन जाए। " यह टिप्पणी सार्वजनिक मंच से की गई थी और इसका वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न ब्राह्मण संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसकी कड़ी निंदा की थी और इस बयान को सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव के लिए खतरा माना गया।
सरकार द्वारा जारी नोटिस के मुख्य बिंदु
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संतोष वर्मा का यह वक्तव्य प्रथम दृष्टया सामाजिक समरसता को ठेस पहुंचाने और आपसी वैमनस्यता उत्पन्न करने वाला प्रयास प्रतीत होता है। नोटिस में 25 नवंबर, 2025 के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों की छायाप्रतियों का भी उल्लेख किया गया है, जो उनके बयान की पुष्टि करते हैं और सरकार ने इस कृत्य को भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं मानते हुए इसे अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा है। यह एक गंभीर आरोप है, जो किसी भी सिविल सेवक के करियर पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
नियमों का उल्लंघन और अनुशासनात्मक कार्रवाई
नोटिस में यह भी बताया गया है कि संतोष वर्मा ने अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियम, 1968 के नियम 3(1) और 3(2)(बी)(i)(ii) का उल्लंघन किया है। ये नियम सिविल सेवकों से सार्वजनिक जीवन में उच्च मानकों का पालन करने और ऐसे किसी भी कार्य से बचने की अपेक्षा करते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़े या सरकार की छवि धूमिल हो। इन नियमों के उल्लंघन के कारण, वर्मा ने स्वयं को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1969 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही का भागी बना लिया है। सरकार ने उनसे पूछा है कि क्यों न उनके विरुद्ध नियम-10(1)(ए) के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
जवाब देने की समय-सीमा और परिणाम
संतोष वर्मा को इस कारण बताओ नोटिस की प्राप्ति के 07 दिनों के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह समय-सीमा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि वे निर्धारित समयावधि में अपना उत्तर प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो सरकार उनके विरुद्ध योग्य एक पक्षीय अग्रेत्तर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। एक पक्षीय कार्रवाई का अर्थ है कि सरकार उनके स्पष्टीकरण का इंतजार किए बिना ही अपने विवेक से निर्णय ले सकती है, जो उनके लिए और भी अधिक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।
सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
आईएएस संतोष वर्मा के इस बयान के सामने आने के बाद से ही। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ब्राह्मण संगठनों ने उनके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए थे। इन संगठनों ने उनके बयान को आपत्तिजनक और समुदाय विशेष के प्रति अपमानजनक बताया था और इसके साथ ही, कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के तमाम नेताओं ने भी संतोष कुमार वर्मा के इस बयान की कड़ी निंदा की थी। राजनीतिक गलियारों में भी इस बयान को लेकर काफी चर्चा हुई और इसे एक संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करार दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों के बयानों का समाज पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है और उन्हें कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें संतोष वर्मा के जवाब पर टिकी हैं। उनके जवाब के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सरकार उनके खिलाफ क्या अंतिम कार्रवाई करती है। यह मामला सिविल सेवा अधिकारियों के लिए आचार संहिता और सार्वजनिक बयानों की संवेदनशीलता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है और सरकार का यह कदम यह भी दर्शाता है कि वह अपने अधिकारियों द्वारा की गई किसी भी आपत्तिजनक टिप्पणी को गंभीरता से लेती है और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।