चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर विपक्षी दलों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी विरोध के तहत आज मंगलवार, 6 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक दिल्ली की सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इंडिया ब्लॉक के तमाम दिग्गज नेता और सांसद संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय तक एक विशाल मार्च निकाल रहे हैं। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा करना और चुनाव आयोग की कथित निष्पक्षता पर सवाल उठाना है।
विपक्ष के दिग्गज नेताओं की भागीदारी
जानकारी के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में विपक्ष के कई बड़े चेहरे शामिल हो रहे हैं। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी जैसे प्रमुख नेता अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। गौरतलब है कि 30 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें सर्वसम्मति से इस मार्च का निर्णय लिया गया था। करीब 19 विपक्षी दलों के नेता इस 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' का हिस्सा बन रहे हैं, जो संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक लगभग 3 किमी की दूरी पैदल तय करेंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और कार्यक्रम का समय
विपक्ष के इस मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संसद मार्ग, चुनाव आयोग कार्यालय और जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। कार्यक्रम के अनुसार, सभी सांसद सुबह 10:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित होंगे और ठीक 11 बजे मार्च की शुरुआत करेंगे। हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और डीएमके ने इस मार्च से दूरी बनाई है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रहा है। इसी के विरोध में लेफ्ट से लेकर कांग्रेस तक के नेता 2 अक्टूबर से ही जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि यह मार्च शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य मतदान चोरी के मुद्दे को उठाना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के साथ लंबी बैठक के बाद इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है।
आगामी आंदोलनों की रूपरेखा
जयराम रमेश ने भविष्य के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 8 अक्टूबर तक गठबंधन की पार्टियां जिला स्तर पर पदयात्राएं और बैठकें आयोजित करेंगी। इसके बाद 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर के साथ-साथ हर गांव की चौपालों में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैलियां निकाली जाएंगी। इस पूरे अभियान का एक बड़ा लक्ष्य उन 13 करोड़ 50 लाख मतदाताओं की जानकारी जुटाना है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से गायब हैं। विपक्ष का मानना है कि यह लोकतंत्र को बचाने की एक निर्णायक लड़ाई है।