CWG 2026: झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज, भारत का खुला खाता

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CWG 2026: झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज, भारत का खुला खाता
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ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत ने इन खेलों में अपना पहला पदक जीत लिया है। मेंस हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग के फाइनल मुकाबले में भारतीय एथलीट झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही ग्लासगो 2026 में भारत का मेडल का खाता भी खुल गया है। झंडू कुमार ने अपनी ताकत और तकनीक का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर जगह बनाई और देश का मान बढ़ाया।

झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन

झंडू कुमार ने इस प्रतियोगिता में बहुत ही सधी हुई शुरुआत की थी और उन्होंने अपनी सबसे अच्छी सफल लिफ्ट के रूप में 190 किलो वजन उठाया। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्हें कुल 130 प्वाइंट 9 हासिल हुए। प्रतियोगिता के दौरान उनके प्रयासों की बात करें तो उन्होंने अपने पहले प्रयास में 181 किलो वजन उठाकर 124 प्वाइंट 7 के साथ एक मजबूत नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में वजन बढ़ाकर 190 किलो किया और इसे सफलतापूर्वक उठाकर अपने स्कोर में सुधार किया।

एक समय ऐसा भी आया जब झंडू कुमार स्टैंडिंग में सबसे ऊपर पहुंच गए थे। अपने आखिरी और तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलो वजन उठाने की कोशिश की। अगर वह इस वजन को उठा लेते, तो बर्मिंघम 2022 में बना कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड टूट सकता था। हालांकि, वह इस लिफ्ट को पूरा नहीं कर पाए और अंत में उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा और झंडू कुमार का यह ब्रॉन्ज मेडल ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का पहला पदक है।

अन्य भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन

झंडू कुमार की सफलता के अलावा अन्य भारतीय पैरा पावरलिफ्टर्स ने भी अपना दमखम दिखाया, हालांकि वे पदक जीतने से चूक गए। मेंस लाइटवेट फाइनल में अशोक ने शानदार प्रदर्शन किया और अपने पर्सनल बेस्ट 200 किलो वजन के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उन्हें इस प्रदर्शन के लिए 143 प्वाइंट 8 मिले। इसी स्पर्धा में परमजीत कुमार ने 176 किलो वजन उठाया और 135 प्वाइंट 6 के साथ सातवें स्थान पर रहे।

महिलाओं की स्पर्धाओं की बात करें तो लाइटवेट कैटेगरी में जसप्रीत कौर ने 100 किलो वजन उठाकर 96 प्वाइंट 4 के साथ छठा स्थान प्राप्त किया। वहीं सुमन देवी ने भी 100 किलो की अपनी सबसे अच्छी लिफ्ट के साथ 88 प्वाइंट 4 हासिल किए और वह सातवें स्थान पर रहीं। महिलाओं के हैवीवेट फाइनल में कस्तूरी राजामणि के लिए दिन अच्छा नहीं रहा और वह कोई भी वैध लिफ्ट नहीं कर पाईं, क्योंकि उनके तीनों प्रयास असफल रहे।

'हवा में उड़ रहा हूं' - झंडू कुमार

मेडल जीतने के बाद झंडू कुमार की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए झंडू कुमार ने कहा कि ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह हवा में उड़ रहे हों। उन्होंने बताया कि यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है और उनके दिमाग में केवल एक ही बात चल रही थी कि उन्हें देश के लिए मेडल जीतना है।

झंडू कुमार ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और कोच को दिया। उन्होंने कहा, "मैं बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इतनी प्रैक्टिस करने दी और इतना प्यार दिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। " झंडू कुमार की इस जीत ने ग्लासगो में भारतीय दल के उत्साह को बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में अन्य एथलीटों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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