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ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी का तीसरा हफ्ता: तेल उद्योग तबाह, क्या छिड़ेगा महासंग्राम?

ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी का तीसरा हफ्ता: तेल उद्योग तबाह, क्या छिड़ेगा महासंग्राम?
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अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। इस नाकाबंदी का नाम अमेरिका ने ‘इकॉनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक तूफान) रखा है, जिसका मकसद ईरान के तेल उद्योग को पूरी तरह से बर्बाद करना है। जानकारों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावनाएं फिलहाल बेहद कम हैं और इस तनाव से पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस महासंग्राम (बड़े युद्ध) का केंद्र ओमान की खाड़ी बन सकता है, जहां अमेरिकी युद्धपोत पहले से ही तैनात हैं। मौजूदा हालात में ईरान को दो मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पहला मोर्चा रोजमर्रा की जरूरत की चीजों और खाद्य संकट को रोकना है, जबकि दूसरा और सबसे गंभीर मोर्चा युद्ध स्तर पर अपने तेल कुओं को बचाने का है। अगर ईरान तेल प्रोडक्शन बंद करता है, तो उसकी तेल क्षमता को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

कैस्पियन रूट और रूस की सहायता

कैस्पियन सागर चारों तरफ से जमीन से घिरा (लैंड लॉकड) है, इसलिए अमेरिकी सेना वहां नाकाबंदी नहीं कर सकती और इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हुए रूस, ईरान की मदद कर रहा है। रूस के आस्त्रखन और मखचकला बंदरगाहों से ईरान के बंदर अंजाली और अमीराबाद बंदरगाहों के बीच जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। पहले जहां इन रूट्स से हथियार और ड्रोन भेजे जाते थे, वहीं अब रूस ईरान के लिए गेहूं, जौ, मक्का, धातु, लकड़ी और केमिकल भेज रहा है। इससे अनाज और रोजमर्रा की चीजों की किल्लत तो कुछ हद तक दूर हो सकती है, लेकिन यह तेल कुओं को बर्बाद होने से नहीं बचा सकता।

तेल भंडारण संकट और अमेरिकी रुख

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान फिलहाल करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन कर रहा है, लेकिन उसकी कुल भंडारण क्षमता मात्र 12 करोड़ बैरल ही है। 29 अप्रैल तक यह क्षमता पूरी तरह भरने की उम्मीद है। ईरान ने अपने सभी बड़े टैंकरों में भी तेल भरना शुरू कर दिया है, लेकिन वे भी लगभग भर चुके हैं और फारस की खाड़ी में तेल से भरे टैंकर तैर रहे हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक पोस्ट में कहा है कि बचे हुए IRGC नेता सीवेज पाइप में फंसे चूहों की तरह दम तोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान का तेल उद्योग उत्पादन बंद करने की कगार पर है और वहां जल्द ही पेट्रोल की कमी होने वाली है।

तेल उत्पादन रोकने के तकनीकी खतरे

ईरान के लिए तेल उत्पादन को पूरी तरह बंद करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उसका ज्यादातर तेल ‘सोर क्रूड’ है। पाइपलाइन में तेल रुकने से यह पानी और गैसों के साथ मिलकर एक एसिड बनाता है, जिससे पाइपलाइन और पंपिंग स्टेशन के पुर्जों में तेजी से जंग लगने और उनके गलने का खतरा बढ़ जाता है। भविष्य में पंप दोबारा शुरू करने पर उनके डैमेज होने का खतरा कई गुना ज्यादा होगा और इसके अलावा, ईरान के पुराने तेल कुओं में तेल के नीचे पानी की परत होती है। पंपिंग रुकने से नीचे का पानी ऊपर आकर चट्टानों में घुस सकता है, जिससे तेल चट्टानों में हमेशा के लिए फंस जाएगा। दबाव कम होने से चट्टानें आपस में चिपक या ढह सकती हैं, जिससे भविष्य में तेल निकालना मुश्किल हो जाएगा और अनुमान है कि ऐसा होने पर ईरान अपनी आने वाली उत्पादन क्षमता का 20 से 30 फीसदी हमेशा के लिए खो देगा।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि बिना समझौते के वह नाकाबंदी नहीं हटाएगा। ऐसे में ईरान के पास तेल कुओं को बचाने के लिए आर-पार (जान की बाजी लगाकर) लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। डर जताया जा रहा है कि ईरान अपनी छोटी नावों या कंटेनर शिप के जरिए ड्रोन हमले करके अमेरिकी नेवी के युद्धपोतों को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह युद्ध का दूसरा और खतरनाक चरण शुरू करेगा, जिसकी चपेट में पूरा मिडिल ईस्ट आ सकता है।

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