Rajasthan Politics: महेंद्रजीत मालवीया सहित 6 नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी का रास्ता साफ, अनुशासन समिति ने सौंपी रिपोर्ट

Rajasthan Politics - महेंद्रजीत मालवीया सहित 6 नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी का रास्ता साफ, अनुशासन समिति ने सौंपी रिपोर्ट
| Updated on: 16-Jan-2026 05:59 PM IST
राजस्थान की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है, खासकर कांग्रेस पार्टी के भीतर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वार रूम में आयोजित अनुशासन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक ने इस हलचल को और बढ़ा दिया है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उन छह प्रमुख नेताओं की कांग्रेस में संभावित घर वापसी पर विस्तार से चर्चा करना था, जिन्होंने पहले पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था और इस घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासी फिजां को गरमा दिया है, क्योंकि यह न केवल कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि भाजपा के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वार रूम में हुई इस अहम बैठक की अध्यक्षता अनुशासन समिति के चेयरमैन और पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने की बैठक में समिति के अन्य सदस्य भी मौजूद थे, जिन्होंने इन नेताओं की वापसी के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया और यह बैठक राजस्थान कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें लिए गए निर्णय का सीधा असर पार्टी की भविष्य की रणनीति और एकजुटता पर पड़ेगा। समिति ने इस संवेदनशील मुद्दे पर गहन मंथन किया, जिसमें सभी संभावित परिणामों पर विचार किया गया।

छह नेताओं की संभावित वापसी

बैठक में जिन छह नेताओं की कांग्रेस में घर वापसी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई, उनमें पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया का नाम सबसे प्रमुख है। मालवीया के अलावा, कांता भील, खिलाड़ी लाल बैरवा, कैलाश मीणा, सुभाष तंबोली और गोपाल गुर्जर भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिनकी वापसी पर विचार किया जा रहा है। इन सभी नेताओं ने किसी न किसी समय कांग्रेस छोड़कर अन्य दलों का रुख किया था, और अब उनकी संभावित वापसी से कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। समिति ने प्रत्येक नेता के मामले पर व्यक्तिगत रूप से गौर किया।

गहन मंथन और चर्चा के बिंदु

अनुशासन समिति की बैठक में केवल नेताओं की वापसी पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि उनके पार्टी छोड़ने के पीछे के मूल कारणों पर भी गहराई से विचार-विमर्श किया गया। समिति ने उन परिस्थितियों का विश्लेषण किया जिनके चलते इन नेताओं ने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का रुख किया था। इसके साथ ही, इन नेताओं पर अतीत में लगे विभिन्न आरोपों की भी समीक्षा की गई, ताकि उनकी वापसी से पार्टी की छवि और आंतरिक अनुशासन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके और समिति का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि इन नेताओं की वापसी से संगठन को किस प्रकार लाभ या हानि हो सकती है, और क्या उनकी वापसी पार्टी की एकजुटता और भविष्य की रणनीतियों के लिए अनुकूल होगी।

जिला स्तर से फीडबैक

इस महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुंचने से पहले, अनुशासन समिति ने एक व्यापक प्रक्रिया अपनाई। समिति ने केवल अपने स्तर पर ही विचार नहीं किया, बल्कि जिला स्तर। के नेताओं और जिलाध्यक्षों से भी इन नेताओं की वापसी को लेकर फीडबैक लिया। यह फीडबैक अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं और विचारों को दर्शाता है। जिला इकाइयों से प्राप्त राय को रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है, ताकि आलाकमान अंतिम निर्णय लेते समय सभी पहलुओं पर विचार कर सके और यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि निर्णय केवल शीर्ष स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यापक परामर्श के बाद लिया जाए।

रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को

बैठक के बाद, अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर पार्टी प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपेगी और उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट आज शाम तक PCC चीफ को दी जाएगी। डोटासरा इस रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे और उसके बाद आलाकमान स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह दर्शाता है कि हालांकि अनुशासन समिति ने अपनी सिफारिशें दे दी हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा, जो इस मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।

कांग्रेस से बेहतर कोई पार्टी नहीं

उदयलाल आंजना ने मीडिया से बातचीत में एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी थी, वे कांग्रेस परिवार का ही हिस्सा थे और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो लोग पार्टी छोड़कर गए थे, उन्हें अब यह महसूस हो गया है कि कांग्रेस से बेहतर कोई पार्टी नहीं है। आंजना ने कहा कि कांग्रेस उनका घर है और जो वापस आना चाहता है, उसका स्वागत किया जाएगा। यह बयान उन नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो कांग्रेस में वापसी की राह देख रहे हैं, और यह पार्टी के खुलेपन को भी दर्शाता है।

सियासी हलचल और भविष्य के संकेत

बैठक के बाद मिले संकेतों से यह साफ है कि महेंद्रजीत सिंह मालवीया की कांग्रेस में घर वापसी का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। हालांकि, अंतिम फैसला आलाकमान के स्तर पर ही लिया जाएगा। इस बीच, अनुशासन समिति की सदस्य शकुंतला रावत ने एक बड़ा दावा कर सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा में कई नेताओं का मोहभंग हो चुका है और वे कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं और रावत ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में भाजपा के कई और नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, जिससे राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह दावा कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संकेत है और भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

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