इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यहूदी त्योहार पासओवर (पेसाच) से ठीक पहले राष्ट्र के नाम एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया है। हिब्रू भाषा में दिए गए इस भाषण में प्रधानमंत्री ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। नेतन्याहू के अनुसार, इजरायल और अमेरिका का संयुक्त अभियान ईरान के इस्लामी शासन को व्यवस्थित तरीके से कमजोर कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों को समाप्त किया जा रहा है और देश अब पहले की तुलना में सामरिक रूप से अधिक सुदृढ़ स्थिति में है।
अमेरिका के साथ संयुक्त सैन्य अभियान की सफलता
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने संबोधन में अमेरिका के साथ पिछले एक महीने से चल रहे सैन्य सहयोग को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समन्वय बहुत प्रभावी ढंग से काम कर रहा है और इस संयुक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य उस शासन को कमजोर करना है जिसने दशकों से क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दिया है। नेतन्याहू के अनुसार, इस सैन्य दबाव ने ईरानी नेतृत्व को हिलाकर रख दिया है और उन्होंने दावा किया कि इस रणनीतिक प्रहार के कारण ईरानी शासन का पतन अब केवल समय की बात है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और अमेरिका की साझेदारी ने ईरान के उन मंसूबों को विफल कर दिया है, जिसके तहत वह पूरे पश्चिम एशिया पर अपना प्रभाव स्थापित करना चाहता था।
ईरान के वित्तीय संसाधनों और सैन्य निवेश का नुकसान
नेतन्याहू ने ईरान द्वारा पिछले कई दशकों में किए गए भारी निवेश का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि ईरानी शासन ने इजरायल को नष्ट करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए लगभग $1000 अरब (1 ट्रिलियन डॉलर) खर्च किए हैं। इस धनराशि का उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण और क्षेत्र के विभिन्न आतंकवादी संगठनों को हथियार और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया गया था और प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इजरायल की हालिया कार्रवाइयों ने इस भारी निवेश को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। उनके अनुसार, ईरान ने जिस सैन्य बुनियादी ढांचे को खड़ा करने में वर्षों लगाए थे, उसे अब व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है, जिससे तेहरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता को गहरा आघात लगा है।
प्रमुख आतंकी नेताओं का खात्मा और सैन्य बढ़त
अपने भाषण के दौरान नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायल द्वारा हासिल की गई सैन्य सफलताओं का उल्लेख किया। उन्होंने उन प्रमुख हस्तियों के नाम गिनाए जिन्हें इजरायली अभियानों में निशाना बनाया गया है। इसमें हिजबुल्ला के हसन नसरल्लाह, हमास के इस्माइल हनियेह और याह्या सिनवार जैसे नाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के नेताओं और परमाणु वैज्ञानिकों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन शीर्ष कमांडरों और नेताओं के खात्मे से ईरान का प्रॉक्सी नेटवर्क बिखर गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ये सफलताएं इजरायली सैनिकों के बलिदान और भारी कीमत चुकाकर मिली हैं, लेकिन इसने इजरायल को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बना दिया है।
क्षेत्रीय गठबंधन और वैश्विक दृष्टिकोण में बदलाव
प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि इजरायल ईरान के खतरे से निपटने के लिए क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण देशों के साथ नए और गुप्त गठबंधन बना रहा है। हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों से इन देशों के नाम उजागर नहीं किए, लेकिन संकेत दिया कि जल्द ही इन रणनीतिक साझेदारियों के बारे में अधिक जानकारी साझा की जाएगी। नेतन्याहू ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी ईरान के प्रति नजरिया बदला है। उन्होंने दावा किया कि कई विश्व नेता जो पहले ईरानी खतरे को नजरअंदाज करते थे, अब निजी तौर पर इजरायल के रुख का समर्थन कर रहे हैं और उनके अनुसार, दुनिया अब समझ चुकी है कि ईरानी शासन न केवल इजरायल के लिए बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
भविष्य की रणनीति और निरंतर अभियान
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने राष्ट्र को आश्वस्त किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा और प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल की आवाज अब पूरी दुनिया में सुनी जा रही है और देश अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने लेबनान और अन्य मोर्चों पर तैनात सैनिकों के साहस की सराहना की और मारे गए सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। नेतन्याहू के अनुसार, इजरायल की वर्तमान सैन्य और कूटनीतिक स्थिति उसे एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित करती है जो अपने दुश्मनों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में सक्षम है।