मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच दशकों पुरानी प्रतिद्वंद्विता एक नए और गंभीर चरण में पहुंच गई है। हालिया घटनाक्रमों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और परिवहन संबंधों में बड़ी गिरावट देखी गई है। बुधवार को क्षेत्र की तीन प्रमुख एयरलाइनों—एमिरेट्स, एतिहाद और फ्लाई दुबई—ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि यूएई ने ईरानी नागरिकों के देश में प्रवेश करने या वहां से ट्रांजिट करने पर रोक लगा दी है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के बीच उठाया गया है, जो दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
इस विवाद की जड़ें 120 साल पुरानी हैं, जो मुख्य रूप से फारस की खाड़ी में स्थित तीन रणनीतिक द्वीपों—अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब—के स्वामित्व से जुड़ी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने कथित तौर पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों से ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है और रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि यूएई ने इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य सहयोग की पेशकश की है, जो ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हवाई यात्रा प्रतिबंध और वर्तमान कूटनीतिक स्थिति
यूएई की प्रमुख एयरलाइनों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। एमिरेट्स और एतिहाद जैसी लंबी दूरी की एयरलाइनों के साथ-साथ कम लागत वाली फ्लाई दुबई ने अपनी वेबसाइटों के माध्यम से यात्रियों को सूचित किया है कि ईरानी पासपोर्ट धारकों को वर्तमान में यूएई के लिए वीजा जारी नहीं किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्र में जारी अस्थिरता के मद्देनजर लिया गया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि ईरान पर दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है और यूएई और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता ने इन संबंधों को हाशिए पर धकेल दिया है।
तीन द्वीपों का ऐतिहासिक और औपनिवेशिक संदर्भ
ईरान और यूएई के बीच क्षेत्रीय विवाद का इतिहास 1905 से शुरू होता है। उस समय ईरान (तत्कालीन फारस) ने अबू मूसा और तुंब द्वीपों पर अपना दावा पेश किया था। हालांकि, उस दौर में ब्रिटेन ने इन द्वीपों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली थी और इन्हें शारजाह और रास अल खैमाह के अमीरात का हिस्सा माना था। यह स्थिति 1971 तक बनी रही, जब ब्रिटेन ने इस क्षेत्र से अपनी सेनाएं वापस बुलाने का फैसला किया। 30 नवंबर 1971 को, यूएई के औपचारिक गठन से ठीक दो दिन पहले, ईरानी सेना ने इन तीनों द्वीपों पर सैन्य कार्रवाई के जरिए कब्जा कर लिया। तब से यूएई इन द्वीपों को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार इनकी वापसी की मांग करता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक और भौगोलिक महत्व
अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब द्वीप फारस की खाड़ी के मुहाने पर, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के अत्यंत निकट स्थित हैं। भौगोलिक दृष्टि से ये द्वीप उस समुद्री मार्ग को नियंत्रित करते हैं जहां से दुनिया का लगभग 40% तेल व्यापार गुजरता है। इन द्वीपों पर जिसका नियंत्रण होता है, वह खाड़ी में आने-जाने वाले सभी वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की निगरानी कर सकता है। ईरान ने इन द्वीपों पर अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत कर रखी है, जिसमें रडार सिस्टम और मिसाइल तैनातियां शामिल हैं। यूएई का तर्क है कि इन द्वीपों पर ईरान का कब्जा न केवल उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए भी एक निरंतर खतरा बना हुआ है।
तेल संसाधन और आर्थिक संप्रभुता का संघर्ष
इन द्वीपों का महत्व केवल सामरिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। अबू मूसा द्वीप के आसपास के क्षेत्रीय जल में तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार होने की पुष्टि हुई है। 1970 के दशक में हुए एक समझौते के तहत, शारजाह और ईरान के बीच तेल राजस्व साझा करने की बात कही गई थी, लेकिन 1971 के पूर्ण सैन्य कब्जे के बाद यह समझौता प्रभावी नहीं रह सका। वर्तमान में, इन संसाधनों का दोहन क्षेत्रीय राजनीति के कारण बाधित है। यूएई का मानना है कि इन द्वीपों की वापसी से उसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता को मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, ईरान इन द्वीपों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति मानता है और किसी भी प्रकार के समझौते से इनकार करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और सुरक्षा परिषद में यूएई के प्रयास
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से उठाने की योजना बना रहा है। अमीराती अधिकारी कथित तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो ईरान के खिलाफ कार्रवाई या द्वीपों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की अनुमति दे सके। यूएई ने अमेरिका, यूरोप और एशिया की प्रमुख शक्तियों से एक सैन्य गठबंधन बनाने की अपील की है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध व्यापार सुनिश्चित किया जा सके। यूएई के राजनयिकों का तर्क है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सुरक्षा की गारंटी देता है, तो कई एशियाई और यूरोपीय देश जो वर्तमान में ईरान के साथ सीधे टकराव से बच रहे हैं, वे भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।