हनुमानगढ़ जिले के नोहर में मंगलवार को सिंचाई पानी की समस्या को लेकर किसानों का बड़ा हुजूम उमड़ा। नोहर फीडर में पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर भादरा मोड़ पर एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया और संयुक्त किसान मोर्चा और नोहर फीडर संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ बड़ी संख्या में पहुंचे। किसानों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि नोहर फीडर में पानी की मात्रा को बढ़ाकर 332 क्यूसेक किया जाए।
11 सूत्रीय मांग पत्र और प्रशासन को चेतावनी
महापंचायत के दौरान किसानों ने प्रशासन को अपना 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। किसान प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में नोहर फीडर में केवल 150 क्यूसेक के आसपास पानी चल रहा है, जो सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। नोहर फीडर से जुड़े लगभग 35 गांवों के किसानों की पूरी खेती इसी पानी पर टिकी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी फसलों के लिए समय पर और पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो उनकी मेहनत और निवेश दोनों बर्बाद हो जाएंगे। महापंचायत के बाद किसानों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय का घेराव करने की घोषणा की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
राजनीतिक समर्थन और नेताओं के संबोधन
इस किसान महापंचायत को माकपा (सीपीआईएम) और कांग्रेस ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है और नोहर विधायक अमित चाचाण भी किसानों के समर्थन में महापंचायत स्थल पर पहुंचे। महापंचायत को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बलवान पूनिया और सीपीआईएम नेता मंगेज चौधरी ने कहा कि सिंचाई पानी पर किसानों का हक है और इसके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को उनके हिस्से का निर्धारित पानी नहीं मिला, तो बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। बलवान पूनिया ने इस दौरान कुछ नहरी अध्यक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उन पर किसानों को गुमराह करने के आरोप लगाए।
नहर की क्षमता और हरियाणा का हस्तक्षेप
सीपीआईएम नेता मंगेज चौधरी ने उन तर्कों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अधिक पानी छोड़ने से नहर टूट सकती है। उन्होंने कहा कि नोहर फीडर में 150 से 170 क्यूसेक पानी बहुत ही आसानी से छोड़ा जा सकता है। वहीं, विधायक अमित चाचाण ने कहा कि नोहर फीडर में पानी हरियाणा की ओर से आता है और हरियाणा की लगातार मनमानी के कारण हमारे क्षेत्र के किसानों के हिस्से का पानी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हक के पानी पर किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक सहयोग
महापंचायत के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसानों ने अपनी अगली रणनीति के बारे में कहा कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे कड़े कदम उठाएंगे। इस आयोजन के दौरान सामाजिक सौहार्द भी देखने को मिला, जहां अरियावाली के ग्रामीणों और गुरुद्वारा समिति की ओर से महापंचायत में आए किसानों के लिए पीने के पानी और लंगर की विशेष व्यवस्था की गई थी।