ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को नई दिशा देने और सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत और विशेषताओं से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि दोनों देश एक-दूसरे के अनुभवों और क्षमताओं का लाभ उठाते हैं, तो वे साझा विकास के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई इस मुलाकात के दौरान उनके स्वागत पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर राष्ट्रपति जिनपिंग द्वारा रखी गई सकारात्मक बातों और उनके रचनात्मक दृष्टिकोण के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दिया और मोदी ने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के कार्यकाल के दौरान चीन की ओर से जो समर्थन और सहयोग प्राप्त हुआ, उसके लिए वे अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से चर्चा करने का एक बेहतरीन अवसर उपलब्ध है।
शी जिनपिंग का सहयोग पर जोर
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग ने इस बात पर विशेष आग्रह किया कि चीन और भारत को ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके साथ ब्रिक्स नेताओं की बैठक में शामिल होना और उनसे एक बार फिर मिलना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने इस शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए प्रधानमंत्री को बधाई भी दी। जिनपिंग ने याद दिलाया कि 5 साल में नई दिल्ली की यह उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकातों में वे 20 से ज्यादा बार मिल चुके हैं और महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचे हैं, जिससे चीन-भारत संबंधों के समग्र विकास को गति मिली है।
रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण
राष्ट्रपति जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन हमेशा चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता और विकसित करता है। उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग-अलग हैं, फिर भी वे एक-दूसरे की खूबियों का पूरा लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, आपसी सफलता हासिल कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। बदलती और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के रूप में चीन और भारत पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता
जिनपिंग ने आगे कहा कि चीन भारतीय पक्ष के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने मानवीय प्रगति और लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख पड़ोसी देशों के बीच उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोग को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण पर जोर दिया ताकि विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए अधिक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की जा सके। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के वर्षों में सीमा पर तनाव के बाद दोनों देशों ने संबंधों को स्थिर करने का प्रयास किया है और सीमा पर शांति बनाए रखने के उद्देश्य से कई कदम उठाए हैं।
ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ का महत्व
इससे पहले अपने संबोधन में जिनपिंग ने कहा कि इस साल ब्रिक्स सहयोग की 20वीं वर्षगांठ है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स सहयोग तंत्र लगातार बढ़ा और विकसित हुआ है, जिसने जबरदस्त जीवंतता दिखाई है। आज यह दुनिया में उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए सबसे प्रभावशाली सहयोग मंच बन गया है। उन्होंने इन 20 वर्षों को आत्मनिर्भरता और मजबूती का काल बताया। जिनपिंग ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल विकास के रास्ते तलाशे हैं और वे उभरते बाजारों के लिए संयुक्त आत्मनिर्भरता का एक मॉडल बनकर उभरे हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और भविष्य की चुनौतियां
शी जिनपिंग ने जोर दिया कि दुनिया अभी गहरे बदलावों से गुजर रही है, जो एक सदी में अभूतपूर्व हैं। एक तरफ ग्लोबल साउथ तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ एकतरफापन और सत्ता की राजनीति भी बढ़ रही है। उन्होंने बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई और उन्होंने कहा कि शांति, विकास, सुरक्षा और शासन में कमियां बढ़ रही हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों को इतिहास के सही पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समान दिशा में ले जाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने मानवता के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।