नीरव मोदी को भारत की जेल में होना चाहिए, प्रत्यर्पण में देरी पर प्रीति पटेल का बड़ा खुलासा

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नीरव मोदी को भारत की जेल में होना चाहिए, प्रत्यर्पण में देरी पर प्रीति पटेल का बड़ा खुलासा
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ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि नीरव मोदी को ब्रिटेन में रहने के बजाय भारत की जेल में होना चाहिए। कंजर्वेटिव पार्टी की शैडो विदेश सचिव के रूप में कार्यरत पटेल ने दावा किया कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में हो रही लगातार देरी के कारण भारत सरकार ब्रिटेन के साथ काम करने को लेकर काफी निराश थी, जिसका असर दोनों देशों के बीच अन्य कूटनीतिक समझौतों पर भी पड़ा।

भारत-ब्रिटेन संबंधों पर प्रत्यर्पण का प्रभाव

द टेलीग्राफ के पॉडकास्ट 'द डायमंड किंग' में बात करते हुए प्रीति पटेल ने खुलासा किया कि जब तक नीरव मोदी के मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई, तब तक भारत ने अवैध प्रवासियों और उन लोगों को वापस लेने के समझौतों पर सहयोग करने से परहेज किया जिनकी शरण की अर्जी खारिज हो गई थी। पटेल के अनुसार, भारत सरकार इस बात से बेहद नाराज थी कि ब्रिटिश कानूनी प्रक्रिया में बार-बार देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत का रुख स्पष्ट था कि जब तक उनके भगोड़ों पर कार्रवाई नहीं होती, वे प्रवासन के मुद्दों पर आसानी से सहमति नहीं देंगे।

ब्रिटिश न्याय प्रणाली की तीखी आलोचना

अपने 2019 से 2022 तक के कार्यकाल को याद करते हुए पटेल ने बताया कि नीरव मोदी और एक अन्य हाई-प्रोफाइल मामले की वजह से भारत ने ब्रिटेन पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखा। उन्होंने नीरव मोदी के इतने लंबे समय तक ब्रिटेन में रहने को वहां की न्याय प्रणाली का घोर दुरुपयोग और ब्रिटिश करदाताओं का अपमान करार दिया और पटेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि मोदी को वैध प्रत्यर्पण प्रक्रिया के तहत भारत की जेल में अपनी सजा काटनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह हमारे सिस्टम का खुला दुरुपयोग है। मेरा मतलब है, इसे बताने का यही एकमात्र तरीका है। सच में ऐसा ही है।

नीरव मोदी पर दर्ज मामले और कानूनी स्थिति

वर्तमान में 55 वर्षीय नीरव मोदी लगभग 2 अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लंदन की पेंटनविले जेल में बंद है। भारतीय जांच एजेंसियां तीन अलग-अलग मामलों में उसकी तलाश कर रही हैं और पहला मामला सीबीआई द्वारा दर्ज कथित पीएनबी धोखाधड़ी का है। दूसरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का है और तीसरा मामला सीबीआई जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़ा है।

प्रत्यर्पण प्रक्रिया में अब तक क्या हुआ?

ब्रिटिश अदालतों ने पर्याप्त सबूत मिलने के बाद नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला सुनाया था। अप्रैल 2021 में प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर होने के बावजूद, मानवाधिकारों के तर्कों और एक गोपनीय शरण आवेदन के कारण यह प्रक्रिया लंबी खिंचती गई। शरण का दावा खारिज होने की खबरों के बाद उसने अपने प्रत्यर्पण मामले को फिर से खोलने का प्रयास किया, जिसे इस साल मार्च में इंग्लैंड के हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके अलावा, फ्रांस में यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में उसकी अंतिम अपील भी विफल रही है और इन सभी कानूनी बाधाओं के हटने के बाद अब उसका भारत प्रत्यर्पण अगला कानूनी कदम माना जा रहा है।

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