'पिछले 5 साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक', पश्चिमी देशों पर बरसते हुए पुतिन का बड़ा बयान

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
'पिछले 5 साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक', पश्चिमी देशों पर बरसते हुए पुतिन का बड़ा बयान
विज्ञापन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर यूक्रेन में जारी सैन्य अभियान को सही ठहराते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि रूस अपने सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल करेगा। मॉस्को में सोमवार को रूस की संघीय संसद 'स्टेट ड्यूमा' के आठवें कार्यकाल के सांसदों को संबोधित करते हुए पुतिन ने भरोसा जताया कि पूरा देश एकजुट होकर जीत हासिल करेगा और रूस की सुरक्षा व संप्रभुता की रक्षा करने में सफल होगा और इस दौरान उन्होंने पश्चिमी देशों पर रूस के खिलाफ एक सोची-समझी मुहिम चलाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। पुतिन का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि रूस अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।

सैन्य अभियान के लक्ष्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पुतिन का रुख

पुतिन ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने सभी लक्ष्य हासिल करेंगे और मिलकर जीत के लिए, रूस के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और उन्होंने यूक्रेन के साथ जारी जंग का जिक्र करते हुए कहा कि विशेष सैन्य अभियान में शामिल हमारे सैनिक रूस और मातृभूमि के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं। पुतिन के अनुसार, इन सैनिकों को पूरे देश और समाज का अटूट समर्थन प्राप्त है, जो उनकी शक्ति का मुख्य स्रोत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा और किसी भी बाहरी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पिछले 5 साल: रूस के लिए कठिन और निर्णायक समय

अपने भाषण के दौरान पुतिन ने पिछले 5 वर्षों के समय को रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि यह समय देश और उसके लोगों के भविष्य की परीक्षा का काल रहा है। पुतिन ने सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी ने मिलकर रूस की संप्रभुता को मजबूत करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस ने हमेशा अपनी स्वतंत्रता की रक्षा को प्राथमिकता दी है और भविष्य में भी इसी मार्ग पर चलता रहेगा। पुतिन का मानना है कि इन 5 वर्षों की चुनौतियों ने रूसी समाज को और अधिक मजबूत और एकजुट बनाया है।

पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड और 'रूसोफोबिया' पर प्रहार

रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के इस्तेमाल में दोहरा रवैया अपनाता है और आत्मनिर्णय के सिद्धांत की बात केवल तभी करता है जब वह उसके अपने हितों के अनुकूल हो। पुतिन ने दावा किया कि वर्ष 2022 से पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ पूरी ताकत से 'रूसोफोबिया' यानी रूस विरोधी अभियान चलाया है। उन्होंने कहा कि रूस पर रिकॉर्ड संख्या में प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन ये सभी प्रतिबंध अपने मूल उद्देश्य में पूरी तरह विफल रहे हैं। पुतिन के अनुसार, रूस की अर्थव्यवस्था और समाज ने इन प्रतिबंधों का डटकर मुकाबला किया है।

रूसी जनता की अटूट शक्ति और बाहरी खतरों का मुकाबला

पुतिन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब भी रूस पर बाहरी खतरा आया है, देश की जनता एकजुट होकर उसके खिलाफ खड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब रूस के विरोधी उसे युद्ध के मैदान में हराने में नाकाम रहे, तो उन्होंने रूसी जनता के खिलाफ खुलेआम आतंकवादी तरीके अपनाने शुरू कर दिए। पुतिन ने दृढ़ता के साथ कहा कि रूस के लोगों को कभी तोड़ा नहीं जा सकता, न पहले कभी ऐसा हुआ है और न ही भविष्य में ऐसा होगा। उन्होंने देश की राजनीतिक व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि रूस की संस्थाएं संविधान के अनुसार एक मजबूत और संप्रभु आधार पर टिकी हैं, जो किसी भी बाहरी दबाव को झेलने में सक्षम हैं।

ट्रंप और जेलेंस्की: युद्ध खत्म करने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय हलचल

एक तरफ जहां पुतिन रूस की संसद में अपनी बात रख रहे थे, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अमेरिका पहुंच चुके हैं और व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बैठक होने वाली है, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं और शांति प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस संबंध में कहा कि अब युद्ध खत्म करने का समय आ गया है। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूस ऐसा कर रहा है, और निश्चित रूप से बड़े स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। यह घटनाक्रम दिखाता है कि युद्ध के मैदान के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी बड़ी हलचल जारी है।

विज्ञापन