बीजिंग में आयोजित एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त रूप से अमेरिका की वैश्विक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। दोनों नेताओं ने एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी करते हुए अमेरिका पर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "जंगलराज" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। यह वार्ता न केवल रूस और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है।
अमेरिका के खिलाफ 4 प्रमुख आरोप
शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में अमेरिका की आलोचना करते हुए 4 मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया। पहले बिंदु के तहत, दोनों नेताओं ने अमेरिका पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और विभिन्न गुटों के बीच टकराव को भड़काने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की दूसरे देशों के घरेलू मामलों में दखल देने की आदत वैश्विक शांति के लिए खतरा है।
दूसरे महत्वपूर्ण बिंदु में, दुनिया भर में चल रही तेल की किल्लत और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया गया। इन प्रतिबंधों के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए रूस ने चीन को तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। इसके साथ ही, चीन और रूस ने अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा उच्च अक्षांश क्षेत्रों यानी हाई एल्टीट्यूड एरिया के सैन्यीकरण पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
तीसरे आरोप में, पुतिन और जिनपिंग ने अमेरिका की "जंगलराज" वाली नीति की कड़ी निंदा की। उन्होंने संप्रभु नेताओं की हत्याओं और राजनयिक जुड़ाव के बहाने किए गए सैन्य हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र की संधि को बरकरार रखने और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
चौथे बिंदु के रूप में, उत्तर कोरिया पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के खिलाफ भी टिप्पणी की गई। पुतिन और जिनपिंग ने इन प्रतिबंधों को विकास के मार्ग में एक बड़ी बाधा बताया। जहां एक ओर परमाणु मुद्दे को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, वहीं चीन और रूस उसे अपना सहयोगी मानते हैं और उसके विकास के पक्षधर हैं।
यूरेशियन एकता और ब्रिक्स की सफलता
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने भाषण के दौरान यूरेशियन देशों के एक बड़े और शक्तिशाली गठबंधन के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों का प्रयोग अत्यंत सफल रहा है और अब समय आ गया है कि यूरेशियन नीति पर गंभीरता से काम किया जाए। पुतिन का मानना है कि एक नया यूरेशियन गठबंधन वैश्विक स्तर पर शक्ति के नए केंद्र के रूप में उभरेगा, जो पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने में सक्षम होगा।
यह बैठक दक्षिण-पश्चिम एशिया में उभरते हुए समानांतर राजनयिक गठबंधनों को भी स्पष्ट करती है। एक तरफ जहां चीन और रूस एक-दूसरे के बेहद करीब आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के सहयोगी देश जैसे दक्षिण कोरिया और जापान भी आपसी समन्वय बढ़ा रहे हैं। बीजिंग में हुई यह वार्ता भविष्य की वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।