लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पटना में नीट (NEET) की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र और बिहार सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को 'सिस्टम की सड़ांध' और 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार देते हुए आरोप लगाया कि यह न्याय की आवाज को दबाने का एक सुनियोजित प्रयास है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिल रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि और 1995 का कानूनी मामला
सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने शनिवार को उनके आवास से हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 1995 के एक पुराने भूमि विवाद मामले में जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई है। पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि यह मामला गर्दनीबाग पुलिस स्टेशन से जुड़ा है और इसमें तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120B के तहत आरोप दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि अदालत में चल रहे ट्रायल के दौरान सांसद तय तारीखों पर पेश नहीं हो रहे थे, जिसके कारण अदालत ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि जब भी कोई पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच की मांग करता है, तो भाजपा-एनडीए मॉडल के तहत केस को भटकाने और परिजनों को प्रताड़ित करने का काम शुरू हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू यादव को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह पटना की बेटी के लिए न्याय की आवाज उठा रहे थे। वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पप्पू यादव से फोन पर बात की। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाथरस और उन्नाव से लेकर पटना तक, भाजपा सरकारें पीड़ितों के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आती हैं। उन्होंने छात्रा की मौत की जांच को संदिग्ध बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
पप्पू यादव का स्वास्थ्य और अस्पताल में स्थानांतरण
गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही पप्पू यादव ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उन्हें तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में स्थानांतरित करने की सलाह दी। अस्पताल ले जाते समय पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर लग रहा है। फिलहाल वह विशेषज्ञों की निगरानी में हैं और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषण और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एक दशक से भी अधिक पुराने मामले में इस समय की गई गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि नीट छात्रा की मौत के मामले में पप्पू यादव की सक्रियता और उसके तुरंत बाद हुई इस कानूनी कार्रवाई को विपक्ष एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में देख रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम आने वाले समय में बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकता है। प्रशासन ने हालांकि स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है और इसका किसी अन्य घटना से कोई संबंध नहीं है।
निष्कर्ष के तौर पर, पप्पू यादव की गिरफ्तारी और नीट छात्रा की मौत के मामले ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और न्याय पर हमला बता रहे हैं, वहीं पुलिस इसे अदालती आदेशों का पालन करार दे रही है। इस मामले में आगामी अदालती कार्यवाही और छात्रा की मौत की जांच की दिशा बिहार की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।