कर्नाटक में चल रही सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली में आयोजित एक मैराथन बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि सिद्धारमैया ही राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पिछले कुछ समय से कर्नाटक के नेतृत्व और मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब पार्टी ने विराम लगाने की कोशिश की है। दिल्ली में पार्टी के कई महत्वपूर्ण मंत्रियों के साथ हुई यह बैठक लगभग 6 घंटे तक चली। इस बैठक के बाद मीडिया को दिए गए एक संक्षिप्त बयान में कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह चर्चा केवल राज्य की 3 खाली राज्यसभा सीटों के बारे में थी। पार्टी ने किसी भी प्रकार के नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को केवल अटकलबाजी करार दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों को जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और राहुल गांधी भी मौजूद थे।
राहुल गांधी का प्रस्ताव और सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक विशेष सलाह दी। राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा चुनाव लड़ने पर विचार करना चाहिए और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इस प्रस्ताव को कर्नाटक में जारी आंतरिक कलह को सुलझाने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सिद्धारमैया ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका नेशनल पॉलिटिक्स में आने का फिलहाल कोई एम्बिशन यानी इरादा नहीं है और सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस प्रस्ताव पर गहराई से विचार करने के लिए पार्टी नेतृत्व से कुछ समय मांगा है। इस चर्चा ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे केवल राज्यसभा चुनाव की रणनीति बताया जा रहा है।
केसी वेणुगोपाल का आधिकारिक स्पष्टीकरण
बैठक के कुछ ही घंटों बाद जब यह खबरें फैलने लगीं कि सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाया जा सकता है, तब कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है और सिद्धारमैया अपने पद पर बने रहेंगे। वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि आज की पार्टी की बैठक का मुख्य एजेंडा केवल आगामी राज्यसभा चुनाव था और इसके अलावा किसी अन्य विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे नेतृत्व परिवर्तन को लेकर किसी भी तरह की अटकलें न लगाएं। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कर्नाटक सरकार के कई अन्य वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित थे, जिन्होंने आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति साझा की।
कर्नाटक में नेतृत्व का पुराना विवाद और 2023 का वादा
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान का यह मुद्दा नया नहीं है, बल्कि यह पिछले 1 साल से अधिक समय से सुर्खियों में बना हुआ है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक इस दावे पर अड़े हुए हैं कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद जब पार्टी ने सरकार बनाई थी, तब शीर्ष नेतृत्व ने बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया था। समर्थकों का मानना है कि अब वह समय आ गया है जब डीके शिवकुमार को कमान सौंपी जानी चाहिए। ऐसी भी खबरें आई थीं कि नेतृत्व में फेरबदल की इस मांग को प्रियंका गांधी वाड्रा का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान फिलहाल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नाराज करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। सिद्धारमैया की उम्र 80 वर्ष हो चुकी है और भले ही उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग राय हो, लेकिन पार्टी के भीतर उनका कद काफी बड़ा है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व सभी गुटों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहा है।