राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है क्योंकि 20 अगस्त से विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सत्र के आगाज से पहले, मंगलवार 18 अगस्त को जयपुर में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सदन के सुचारू संचालन, संभावित विधायी कार्यों और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना था। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अपनी-अपनी रणनीतियों और मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा, जिससे आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस के संकेत मिल रहे हैं।
सर्वदलीय बैठक में शामिल प्रमुख नेता
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने शिरकत की और बैठक में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग प्रमुख रूप से मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से मुख्य सचेतक रफीक खान ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा, अन्य दलों के प्रतिनिधियों में भारत आदिवासी पार्टी के थावरचंद, बहुजन समाज पार्टी के मनोज कुमार और राष्ट्रीय लोकदल के डॉ और सुभाष गर्ग भी शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने सदन की कार्यवाही को लेकर अपने-अपने विचार साझा किए और आगामी सत्र के लिए अपनी प्राथमिकताएं बताईं।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बैठक के बाद सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार छात्रों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, मजदूरों और दलितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा करने से कतरा रही है। जूली ने स्पष्ट रूप से कहा कि आगामी चुनावों का हवाला देकर विधानसभा सत्र की अवधि को छोटा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छात्रों और स्कूलों से जुड़े विषयों सहित प्रदेश की जनता के हितों से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में विस्तृत और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
सत्र की अवधि और यूसीसी पर तकरार
टीकाराम जूली ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री सदन में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देने से बचना चाहते हैं। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष चाहता है कि विधानसभा का सत्र कम से कम 20 से 25 दिन तक चले। जूली के अनुसार, विपक्ष की इस मांग के विपरीत सरकार की मंशा सत्र को बहुत ही सीमित अवधि में समाप्त करने की दिखाई दे रही है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से सही नहीं है।
सरकार का पलटवार और जवाबदेही का दावा
विपक्ष के आरोपों पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सदन के संभावित बिजनेस की पूरी जानकारी दे दी है। गर्ग ने बताया कि प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष और सरकार मिलकर सत्र की वास्तविक अवधि तय करेंगे और उनके अनुसार, वर्तमान कार्यक्रम के हिसाब से सदन 25 अगस्त तक चलने की संभावना है। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सरकार चर्चा से भाग रही है।
राम मंदिर चंदा और अन्य मुद्दों पर चर्चा
जोगेश्वर गर्ग ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष सदन में हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे कितना भी आक्रामक रुख अपनाए, सरकार पीछे नहीं हटेगी और विपक्ष द्वारा राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर चर्चा की मांग पर गर्ग ने कहा कि सरकार इस विषय पर भी जवाब देने के लिए तैयार है। 20 अगस्त से शुरू होने वाले इस सत्र में शिक्षा, यूसीसी, युवाओं और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामे और तीखी बहस के आसार बने हुए हैं।