जयपुर, 18 अगस्त। राजस्थान में आगामी निकाय एवं पंचायत चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि आगामी चुनावों में टिकट वितरण के दौरान युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी का मुख्य फोकस इस बात पर है कि करीब 60 प्रतिशत टिकट युवा चेहरों को दिए जाएं, ताकि स्थानीय शासन में नई ऊर्जा का संचार हो सके।
जीत की क्षमता और जमीनी पकड़ पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी नेता की सिफारिश के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, उम्मीदवार की स्थानीय जनता के बीच पकड़ और उसकी चुनाव जीतने की वास्तविक क्षमता को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गहलोत ने यहां तक कहा कि यदि वे स्वयं भी किसी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश करते हैं, तो केवल उस सिफारिश को टिकट का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यवेक्षकों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने की वकालत की।
गहलोत ने युवाओं को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट देने का समर्थन किया और कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव के साथ-साथ नई पीढ़ी को आगे लाना समय की मांग है। उनका मानना है कि यदि जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया गया, तो कांग्रेस इन चुनावों में शानदार प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का आह्वान किया।
संगठनात्मक बैठक और फीडबैक प्रक्रिया
डोटासरा ने जानकारी दी कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में विधायक, विधायक प्रत्याशी, संगठन के पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसी बैठक के माध्यम से निकाय एवं पंचायत चुनावों के लिए पार्टी के चुनावी अभियान को औपचारिक रूप से गति दी जाएगी। पार्टी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश में है जो न केवल चुनाव जीत सकें, बल्कि संगठन के लिए लंबे समय तक सक्रिय रहकर कार्य करें। वर्तमान में जिलों के नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है और अब तक लगभग 27 से 28 जिलों के नेताओं के साथ चर्चा पूरी हो चुकी है।
भाजपा सरकार पर तीखे हमले
इस दौरान डोटासरा ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने ढाई साल के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कार्यों का 5 प्रतिशत काम भी नहीं किया है। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार और तबादलों में भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए और शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि गड़बड़ियों के चलते करीब 400 तबादले निरस्त करने पड़े हैं। हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में हो रही देरी और लॉटरी स्थगित किए जाने के मुद्दे पर भी डोटासरा ने सरकार को घेरा और उन्होंने दावा किया कि चुनाव में देरी होने के कारण लगभग 1900 करोड़ रुपये की टीएफसी और एसएफसी राशि लैप्स होने की कगार पर है। उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए और कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कांग्रेस इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चुनावों से पीछे नहीं हटेगी और जनता के बीच सरकार की विफलताओं को उजागर करेगी।
राजनीतिक विवाद और मीडिया पर पाबंदी
डोटासरा ने भाजपा के 'ट्रिपल इंजन सरकार' के दावे पर भी कटाक्ष किया। वहीं, अशोक गहलोत ने वंदे मातरम विवाद को लेकर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी भाजपा को आड़े हाथों लिया। इसके अलावा, गहलोत ने स्कूलों में मीडिया के प्रवेश और कवरेज पर रोक लगाने वाले सरकारी आदेश पर सवाल उठाए और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को सुविधाएं देने पर होना चाहिए, न कि पारदर्शिता को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों पर।