राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने राज्य विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान फसल बीमा योजना में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं का खुलासा किया है। मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत लगभग 32,000 इंटीमेशन फॉर्म में गंभीर गड़बड़ी पाई गई है। इन मामलों में माफिया तत्वों द्वारा किसानों की फसल क्षति को दस्तावेजों में 0% दर्शाया गया, जबकि धरातल पर वास्तविक नुकसान 50% से 70% के बीच था। इस हेरफेर के कारण किसानों का लगभग 128 करोड़ रुपये का बीमा भुगतान अटक गया।
32,000 फॉर्म में हेरफेर और 128 करोड़ का भुगतान
कृषि मंत्री ने सदन को सूचित किया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि माफिया तत्वों ने जानबूझकर फसल नुकसान को शून्य दिखाया और अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बीमा राशि के भुगतान को रोकना था। नुकसान शून्य दिखाए जाने के कारण बीमा कंपनी ने 128 करोड़ रुपये की राशि अपने पास ही रोक ली। मंत्री ने बताया कि इस राशि को रोककर कंपनी ने उस पर ब्याज भी अर्जित किया है, जो सीधे तौर पर किसानों के अधिकारों का हनन है।
बीमा कंपनी के खिलाफ एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेमा इंश्योरेंस कंपनी (Kshema Insurance Company) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मंत्री के अनुसार, यह प्रकरण रावला थाना क्षेत्र से संबंधित है, जहां एफआईआर संख्या 0210 दर्ज की गई है। जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336, 337, 340 और 2(बी) एस के तहत संचालित की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनी के आचरण की गहन जांच की जा रही है ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
घोटाले में शामिल जिले और सिंडिकेट की भूमिका
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला मुख्य रूप से नागौर, बीकानेर, चूरू, सांचौर और जालौर जिलों में फैला हुआ है। मंत्री ने बताया कि इस अनियमितता में केवल बाहरी माफिया ही नहीं, बल्कि बीमा कंपनी के कुछ कर्मचारी और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं। इन तत्वों ने मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट बनाया जिसने वास्तविक नुकसान को छिपाकर सरकारी और निजी धन का दुरुपयोग करने का प्रयास किया।
केंद्र सरकार को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
राज्य सरकार ने संबंधित बीमा कंपनी को 'डिफॉल्टर' मानते हुए भारत सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में अनुरोध किया गया है कि भविष्य में इस कंपनी को किसी भी सरकारी टेंडर में शामिल न किया जाए। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनियों के एम्पेनलमेंट का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होता है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने पीसीआरसी और एसआरसी में सुनवाई के बाद किसानों को 122 करोड़ रुपये का भुगतान दिलाने का निर्णय लिया है।
एसबीआई सालासर और फर्जी दस्तावेजों का मामला
किरोड़ीलाल मीणा ने सालासर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा से जुड़े एक अन्य फर्जीवाड़े का भी उल्लेख किया और जांच में पाया गया कि 71 मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले गए और ऋण मंजूर किए गए। बीकानेर जिले की गजनेर तहसील के तहसीलदार ने पुष्टि की है कि रिकॉर्ड में उन नामों का कोई वैध किसान मौजूद नहीं है। इसके अतिरिक्त, बिना आवश्यक दस्तावेजों के प्रीमियम कार्ड जारी करने की कोशिश भी पकड़ी गई, जिससे सरकार को लगभग 9 करोड़ रुपये का अतिरिक्त चूना लग सकता था।