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सांसद राजकुमार रोत ने TAD विभाग पर लगाया फंड दुरुपयोग का आरोप

सांसद राजकुमार रोत ने TAD विभाग पर लगाया फंड दुरुपयोग का आरोप
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भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने जनजाति क्षेत्रीय विकास (TAD) विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सांसद ने विभाग पर बजट के गलत इस्तेमाल और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। रोत के अनुसार, विभाग के फंड का उपयोग उन कार्यों के लिए किया जा रहा है जो आदिवासी समुदाय के कल्याण से संबंधित नहीं हैं। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए सरकार को घेरा है।

बजट लैप्स और बिना टेंडर कार्यों के आरोप

सांसद राजकुमार रोत ने दावा किया कि साल 2024 के लिए आवंटित ₹1500 करोड़ का बजट खर्च नहीं किया गया और पूरा पैसा लैप्स हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में ₹40 करोड़ के कार्य बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के शुरू किए गए। रोत के अनुसार, यह प्रक्रिया नियमों का उल्लंघन है और इससे गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने विभाग की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर बजट का लैप्स होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

फर्जी हस्ताक्षर और भ्रष्टाचार का दावा

सांसद ने TAD विभाग के कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए काम कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। रोत ने कहा कि जब इस संबंध में सरकार से सवाल पूछा गया, तो मंत्री ने FIR दर्ज कराने की बात कही, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस अनुसंधान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग कुछ दलालों के नियंत्रण में है और वहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है और रोत ने आशंका जताई कि यदि कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर हो सकते हैं, तो अन्य उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षरों का भी दुरुपयोग संभव है।

छात्रावासों के राजनीतिक उपयोग पर आपत्ति

राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि आदिवासी छात्रावासों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सिरोही जैसे क्षेत्रों में छात्रावास अधीक्षक विशिष्ट संगठनों के प्रचारक के रूप में कार्य कर रहे हैं। सांसद के अनुसार, इन छात्रावासों में पढ़ने वाले हजारों आदिवासी बच्चों के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों का उपयोग किसी विशेष विचारधारा या दल के प्रचार के लिए करना अनुचित है।

धार्मिक सम्मेलनों में सरकारी सामग्री का उपयोग

सांसद ने आरोप लगाया कि हिंदू विराट सम्मेलन जैसे आयोजनों के लिए छात्रावासों की छुट्टियां कर दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रावास के बच्चों के लिए आने वाली राशन सामग्री और अन्य संसाधनों का उपयोग इन सम्मेलनों के आयोजन में किया जा रहा है। रोत के अनुसार, छात्रावास अधीक्षक बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने के बजाय इन आयोजनों की व्यवस्थाओं में व्यस्त हैं। उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग करार दिया है।

काश्तकारी अधिनियम और भूमि अधिग्रहण पर चिंता

सांसद ने राजस्थान काश्तकारी अधिनियम में किए गए बदलावों पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मूल अधिनियम 1995 की धारा 42-बी में दी गई राहत को बदलकर अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। रोत ने लैंड कन्वर्जन एक्ट के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय की जमीनों पर संकट बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से इन नियमों में सुधार करने और आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।

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