राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के वरिष्ठ अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और 2011 बैच के अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री का नाम अक्सर विवादों से जुड़ा रहा है और इस बार भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते उन पर यह गाज गिरी है। हालांकि, निलंबन के विशिष्ट कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है। लिग्री के निलंबन की खबर ने नौकरशाही में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि वह राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के साथ तल्ख रिश्ते
बलवंत सिंह लिग्री के निलंबन के पीछे एक बड़ा कारण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के साथ उनके खराब संबंधों को भी माना जा रहा है। राजस्थान स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन में कार्यकारी निदेशक के पद पर तैनात होने से पहले, वह भजनलाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के ओएसडी (अधिकारी विशेष कर्तव्य) के रूप में कार्यरत थे और सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, मंत्री और अधिकारी के बीच तालमेल पूरी तरह खत्म हो चुका था और रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे। विवाद इस कदर बढ़ गया था कि स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लिग्री को अपने कार्यालय से तुरंत हटाने की मांग की थी और मंत्री की इसी नाराजगी के बाद उन्हें ओएसडी पद से हटाकर बेवरेज कॉर्पोरेशन भेजा गया था।
जेडीए का कार्यकाल और भूमि आवंटन का विवाद
बलवंत सिंह लिग्री के करियर में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) का कार्यकाल उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है। 2011 बैच के इस अधिकारी ने अपने करियर के दौरान खेतड़ी, सिकराय, तिजारा, आसींद और नीमराणा जैसे महत्वपूर्ण उपखंडों में एसडीएम के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा, उन्होंने जेडीए के विभिन्न जोनों में उपायुक्त की जिम्मेदारी भी संभाली थी। सूत्रों का कहना है कि जेडीए में उनके कार्यकाल के दौरान एक विवादित भूमि प्रकरण सामने आया था, जो अब उनके निलंबन का मुख्य आधार बना है। जेडीए भूमि आवंटन और नियमन से जुड़े इस गंभीर मामले में वर्तमान में उच्च स्तरीय विभागीय जांच चल रही है, जिसमें कई अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का सख्त संदेश
राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को प्रशासन में पारदर्शिता लाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक जेडीए भूमि प्रकरण की विस्तृत और अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक बलवंत सिंह लिग्री का निलंबन जारी रहेगा। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ही उनके खिलाफ भविष्य की दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि सरकार सार्वजनिक हितों और प्रशासनिक शुचिता के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।