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आरबीआई की सख्ती: डॉलर के मुकाबले रुपया 93.04 पर हुआ मजबूत

आरबीआई की सख्ती: डॉलर के मुकाबले रुपया 93.04 पर हुआ मजबूत
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भारतीय मुद्रा बाजार में सोमवार को रुपये ने मजबूती का रुख दिखाया। 04 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। यह तेजी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को नियंत्रित करने और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के बाद देखी गई है और 18 के स्तर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहे थे।

आरबीआई के कड़े नियम और सट्टेबाजी पर नियंत्रण

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मुद्रा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण नियामक हस्तक्षेप किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने बैंकों को ऑनशोर फॉरवर्ड मार्केट में सक्रिय होने से रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, सट्टेबाजी की स्थितियों पर लगाम लगाने के लिए नियमों को और अधिक सख्त किया गया है। आरबीआई ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोज़िशन्स (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर निर्धारित कर दी है। इन उपायों का प्राथमिक उद्देश्य रुपये में होने वाली अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और घरेलू मुद्रा की स्थिति को मजबूत करना है और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियामक बदलावों ने बाजार में तरलता और ट्रेडिंग पैटर्न को प्रभावित किया है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव

रुपये में सुधार के बावजूद, वैश्विक स्तर पर जारी तनाव भारतीय मुद्रा पर दबाव बनाए हुए है। अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता पैदा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से खोलने के लिए दी गई समय सीमा और चेतावनी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 29 डॉलर प्रति बैरल पर देखा गया। हालांकि तेल की कीमतों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन भू-राजनीतिक अस्थिरता और डॉलर इंडेक्स की स्थिति रुपये की भविष्य की दिशा के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।

घरेलू शेयर बाजार और विदेशी पूंजी की निकासी

मुद्रा बाजार के साथ-साथ घरेलू इक्विटी बाजार में भी सोमवार को सकारात्मक रुख देखा गया। 85 के स्तर पर बंद हुआ। 25 पर पहुंच गया। हालांकि, शेयर बाजार की इस तेजी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी की निकासी जारी है। 13 करोड़ के शेयर बेचे। विदेशी पूंजी का यह बहिर्वाह रुपये की मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दर्ज की गई है। 058 अरब डॉलर रह गया है। 346 अरब डॉलर पर था। विदेशी मुद्रा भंडार में यह कमी वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और आरबीआई द्वारा रुपये को संभालने के लिए किए गए संभावित हस्तक्षेपों का परिणाम मानी जा रही है और भंडार का यह स्तर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बाहरी ऋण भुगतान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सेवा क्षेत्र की विकास दर में दर्ज की गई सुस्ती

आर्थिक मोर्चे पर एक अन्य महत्वपूर्ण अपडेट भारत के सेवा क्षेत्र से आया है। एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, मार्च महीने में भारत के सेवा क्षेत्र की विकास गति पिछले 14 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। 5 पर आ गया है। यह गिरावट नए व्यापारिक ऑर्डर और गतिविधियों में आई सुस्ती को दर्शाती है। हालांकि सूचकांक अभी भी 50 के स्तर से ऊपर है, जो विस्तार का संकेत देता है, लेकिन विकास की रफ्तार का धीमा होना घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।

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