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: रूस और बेलारूस का परमाणु गठबंधन: 10 परमाणु हथियारों की तैनाती और सैनिकों का प्रशिक्षण शुरू

- रूस और बेलारूस का परमाणु गठबंधन: 10 परमाणु हथियारों की तैनाती और सैनिकों का प्रशिक्षण शुरू
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रूस और बेलारूस के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग ने वैश्विक स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा 2023 में की गई घोषणा के बाद अब बेलारूस की धरती पर परमाणु हथियारों की तैनाती की तैयारियां अपने निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। उस समय बेलारूस ने अपने संविधान में आवश्यक संशोधन भी किए थे ताकि इन हथियारों की तैनाती का कानूनी मार्ग प्रशस्त हो सके। ताजा जानकारी के अनुसार बेलारूस को रूस से लगभग 10 परमाणु हथियार मिल सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश दुनिया के अन्य हिस्सों में परमाणु प्रसार को रोकने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रूस ने अपने रणनीतिक साझेदार के साथ मिलकर एक नई मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।

सैनिकों का प्रशिक्षण और रूसी वैज्ञानिकों की भूमिका

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बेलारूस की सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने अपने सैनिकों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू कर दिया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बेलारूसी जवानों को परमाणु हथियारों के तकनीकी संचालन और उनके इस्तेमाल की बारीकियों से अवगत कराना है और बेलारूस के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गुप्त रखी जा रही है। माना जा रहा है कि रूस के अनुभवी वैज्ञानिक और सैन्य विशेषज्ञ इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की निगरानी कर रहे हैं और जैसे ही जवानों का प्रशिक्षण पूरा होगा, रूस से परमाणु हथियारों की खेप बेलारूस पहुंच जाएगी। हालांकि इन हथियारों का अंतिम नियंत्रण मॉस्को के पास ही रहने की संभावना है, लेकिन बेलारूस की जमीन का उपयोग रणनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाएगा।

रूस की विशाल परमाणु शक्ति और मिसाइल तकनीक

रूस वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार मॉस्को के पास 5000 से ज्यादा परमाणु हथियार मौजूद हैं। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा था कि रूस एक ऐसी मिसाइल तैनात करने जा रहा है जिसकी मारक क्षमता 35000 किलोमीटर है। इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल माना जा रहा है और रूस के बेड़े में RS-28 Sarmat, RS-24 Yars और Topol-M (SS-27) जैसे अत्यंत विनाशकारी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) शामिल हैं, जो किसी भी आधुनिक सुरक्षा घेरे को भेदने की क्षमता रखते हैं।

रणनीतिक साझेदारी और नाटो पर बढ़ता दबाव

बेलारूस रूस का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे और भी खास बनाती है। बेलारूस की सीमाएं रूस और यूक्रेन के साथ-साथ तीन नाटो सदस्य देशों से भी लगती हैं। पुतिन बेलारूस की इस स्थिति का लाभ उठाकर पूरे यूरोप और नाटो गठबंधन पर मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव बनाना चाहते हैं। 2023 में जब पुतिन ने 10 परमाणु हथियार तैनात करने की बात कही थी, तब उन्होंने दावा किया था कि इनके इस्तेमाल में बेलारूस की कोई सीधी भूमिका नहीं होगी। हालांकि अब जिस तरह से बेलारूसी सैनिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, उससे इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

बेलारूस और यूक्रेन के बीच की सीमा 1000 किलोमीटर से भी अधिक लंबी है। यूक्रेन युद्ध के बीच बेलारूस में इन खतरनाक हथियारों की तैनाती के माध्यम से रूस यह संदेश दे रहा है कि वह युद्ध क्षेत्र का विस्तार करने और अपनी सुरक्षा सीमाओं को नाटो के और करीब ले जाने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम न केवल पूर्वी यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को मौलिक रूप से बदल सकता है, बल्कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और परमाणु संतुलन में भी बड़े बदलाव ला सकता है।

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