सचिन पायलट का राजस्थान सरकार पर बड़ा हमला, स्कूलों की बदहाली पर मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
सचिन पायलट का राजस्थान सरकार पर बड़ा हमला, स्कूलों की बदहाली पर मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
विज्ञापन

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन काफी हंगामेदार रहा, जहां कांग्रेस विधायकों ने स्कूलों की बदहाली के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और धरना दिया और पायलट ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय अपनी विफलताओं को छुपाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों की जान पर बन आई है, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।

जर्जर भवन और बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा

धरने के दौरान मीडिया से बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और उन्होंने मानसून के मौसम का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में स्कूलों की हालत अत्यंत जर्जर है, जो गहरी चिंता का विषय है। पायलट ने याद दिलाया कि पिछले साल स्कूलों की छत गिरने जैसी घटनाओं में कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी और उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को तुरंत मरम्मत और पुनर्निर्माण की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत सरकार ने स्कूल परिसरों में मीडिया और आम जनता के प्रवेश पर पाबंदियां लगा दी हैं ताकि वहां की बदहाली की तस्वीरें बाहर न आ सकें।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर साधा निशाना

सचिन पायलट ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और उन्होंने कहा कि एक शिक्षा मंत्री की प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। पायलट ने कहा कि जब स्कूलों की हालत इतनी खराब है और बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, तो इसकी पूरी जवाबदेही शिक्षा मंत्री की बनती है और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मदन दिलावर को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पायलट ने यह भी उल्लेख किया कि राजस्थान हाईकोर्ट भी कई बार स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार को फटकार लगा चुका है, लेकिन सरकार जनता की मांगों और अदालत के निर्देशों को अनसुना कर रही है।

वित्तीय प्रबंधन और स्कूलों की बंदी पर आरोप

पायलट ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अन्य योजनाओं पर खर्च करने के लिए 1000 करोड़ रुपये मौजूद हैं, लेकिन जब बात स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं को सुधारने की आती है, तो सरकार बजट का रोना रोती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में नए स्कूल खोले थे, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार स्कूलों को बंद करने की दिशा में काम कर रही है। कई स्थानों पर शिक्षक नहीं हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण छात्र खुद सड़कों पर उतरकर धरना देने को मजबूर हैं।

राजनीतिक भटकाव और राष्ट्रीय मुद्दों पर घेराव

भाजपा पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि जब भी जनता मूल मुद्दों पर जवाब मांगती है, तो भाजपा नेता पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी का नाम लेकर ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा यह क्यों नहीं बताती कि पिछले 12 वर्षों में उनकी सरकार ने क्या ठोस काम किए हैं? पायलट ने दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल और बिहार में हुई फायरिंग की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में एक छात्र की आंख की रोशनी चली गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पिछले 20 दिनों से संसद में सवाल पूछ रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने एक बार भी सदन में आकर जवाब नहीं दिया, और अब वही स्थिति राजस्थान में भी दोहराई जा रही है।

यूसीसी और आगामी चुनावों की रणनीति

सत्र के दौरान कॉमन सिविल कोड (यूसीसी) बिल लाने की चर्चाओं पर पायलट ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और राजस्थान में भी अलग-अलग समुदायों और आदिवासियों की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यूसीसी लाना ही है तो इसे पूरे देश में एक साथ क्यों नहीं लाया जाता और उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल हिंदू-मुसलमान की राजनीति कर शिक्षा और रोजगार जैसे जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना चाहती है। अंत में, उन्होंने आगामी निकाय और पंचायत चुनावों के लिए कांग्रेस की तैयारी का दावा किया और कहा कि सरकार हार के डर से पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी में देरी कर रही है, लेकिन जनता इस बार भाजपा को सबक सिखाने के लिए तैयार है।

विज्ञापन