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केशव प्रसाद जैसा सीएम होना चाहिए? अविमुक्तेश्वरानंद की सफाई से मचा बवाल

केशव प्रसाद जैसा सीएम होना चाहिए? अविमुक्तेश्वरानंद की सफाई से मचा बवाल
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इन दिनों सियासी पारा अपने चरम पर है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के धरने ने राज्य सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है और शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखे हमले करते हुए उनके शासन की तुलना मुगलकाल से कर दी है। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान की सराहना करते हुए उन्हें एक जिम्मेदार नेता बताया है। इस बयान के बाद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गईं, जिस पर अब शंकराचार्य ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

योगी सरकार पर 'मुगलकालीन' होने का आरोप

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन की कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह नए जमाने की 'हिंदू नामधारी मुगल सरकार' है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह मुगलों ने हिंदुओं को उनके धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान से रोका था, वैसा ही व्यवहार आज की सरकार कर रही है। शंकराचार्य का कहना है कि सरकार बटुकों और संन्यासियों को प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने सीएम योगी पर 'ठकुरैती' करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी अहंकार के कारण सवा लाख शिवलिंग के दर्शन बाधित हुए हैं।

केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ और सीएम पर सवाल

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों के बीच के अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य का बयान बेहद जिम्मेदारी। भरा है और वह समाधान की बात कर रहे हैं। शंकराचार्य के अनुसार, जनता दोनों नेताओं के वक्तव्यों का आकलन कर रही है और लोग केशव मौर्य की बातों की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री ऐसा होना चाहिए जो जन-जन का ख्याल रखे, न कि ऐसा जो जनता को परेशान करे।

मुख्यमंत्री बदलने की मांग पर दी सफाई

जब विवाद बढ़ा कि क्या शंकराचार्य केशव प्रसाद मौर्य को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, तो उन्होंने इस पर सफाई दी। उन्होंने कहा, "हम मुख्यमंत्री बदलने की बात नहीं कह रहे हैं। यह जनता की आवाज है जिसे हमने केवल दोहराया है। " उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ योगी आदित्यनाथ का रुख है और दूसरी तरफ केशव मौर्य का, और जनता को मौर्य का रुख अधिक संवेदनशील लग रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मंशा किसी राजनीतिक पद। में बदलाव की नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की है।

सवा लाख शिवलिंग का क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद सवा लाख शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शुरू हुआ। माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को एक साथ इन शिवलिंगों के दर्शन कराने की योजना थी। शंकराचार्य ने ट्रकों में भरकर ये शिवलिंग मंगवाए थे, जिन्हें पूजा के बाद छत्तीसगढ़ के कवर्धा स्थित शापात लक्षेश्वर धाम ले जाया जाना था। हालांकि, प्रशासन के साथ हुए विवाद के कारण यह अनुष्ठान रुक गया। शंकराचार्य का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर इस धार्मिक कार्य में बाधा डाली है, जिससे भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं।

प्रयागराज में तनावपूर्ण स्थिति

प्रयागराज में शंकराचार्य का धरना जारी है और उनके समर्थन में साधु-संतों का जमावड़ा लग रहा है। प्रशासन इस मामले को शांत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन शंकराचार्य अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इस विवाद ने न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है, खासकर तब जब राज्य में अंदरूनी राजनीतिक खींचतान की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

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