राजस्थान के सीकर जिले के झाड़ली गांव की बेटी और रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) की जांबाज जवान पूनम कंवर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है और पूनम ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर तिरंगा फहराया है। 21 अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर उन्होंने 5642 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। इस गौरवशाली क्षण में उन्होंने न केवल भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया, बल्कि अपनी सेवा यानी आरपीएफ का विभागीय ध्वज भी शिखर पर स्थापित किया।
11 दिनों का कठिन संघर्ष और सफलता
पूनम कंवर का यह अभियान 10 अगस्त को नई दिल्ली से शुरू हुआ था। 11 दिनों तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान के दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। माउंट एल्ब्रुस रूस की काकेशस पर्वत शृंखला में स्थित है और यह जॉर्जिया की सीमा के अत्यंत निकट है। इसे दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों यानी सेवन समिट्स में गिना जाता है। पूनम की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प का परिणाम है, जिसने उन्हें यूरोप के सबसे ऊंचे बिंदु तक पहुँचाया।
तीन महाद्वीपों पर फहरा चुकी हैं तिरंगा
पूनम कंवर का पर्वतारोहण का सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। वह अब तक तीन महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह कर चुकी हैं और साल 2024 में उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलीमंजारो पर चढ़ाई की थी, जिसकी ऊंचाई 19341 फीट है। इसके बाद साल 2025 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियोस्को को फतह किया, जो 7310 फीट ऊंची है। अब साल 2026 में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह करके उन्होंने अपनी सफलता की हैट्रिक पूरी कर ली है। उनका अगला लक्ष्य दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा फहराना है, जिसमें उनका सबसे बड़ा सपना माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचना है।
NCC से शुरू हुआ जांबाज सफर
पूनम के पिता रतन सिंह शेखावत एक सेवानिवृत्त फौजी हैं, जिनसे उन्हें देशभक्ति और अनुशासन की प्रेरणा मिली। पूनम को बचपन से ही खेलकूद और एनसीसी (NCC) की गतिविधियों में गहरी रुचि थी और वर्ष 2014 में रेलवे सुरक्षा विशेष बल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपने जुनून को कम नहीं होने दिया। उन्होंने कमांडो ट्रेनिंग के साथ-साथ तीरंदाजी और घुड़सवारी का भी कड़ा प्रशिक्षण लिया है। अपनी पर्वतारोहण क्षमताओं को निखारने के लिए उन्होंने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की कई दुर्गम चोटियों पर चढ़ाई की और पर्वतारोहण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्र हासिल किए।
महिलाओं के लिए प्रेरणा और आदर्श
वर्तमान में जयपुर की 16वीं वाहिनी आरपीएसएफ में तैनात पूनम कंवर जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में रहती हैं। उनका मानना है कि उनके इन अभियानों का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि समाज की महिलाओं को यह संदेश देना है कि वे किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और पूनम ओलंपिक पदक विजेता और राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को अपना आदर्श मानती हैं। वह उनके सैन्य अनुभव और खेल जगत की उपलब्धियों से काफी प्रभावित हैं। पूनम के अनुसार, कर्नल राठौड़ उनके हर अभियान में उनका उत्साहवर्धन करते हैं, जिससे उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।