तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर इस समय कोलकाता से लेकर दिल्ली तक एक बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। बंगाल में विधायकों के बीच हुई बगावत के बाद अब आने वाले कुछ दिनों में टीएमसी के लोकसभा सांसदों का भी एक नया ग्रुप बन सकता है। इस संभावित टूट को ममता बनर्जी के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, एक दर्जन से ज्यादा सांसद इस नए टीएमसी ग्रुप में शामिल हो सकते हैं। इस समूह का नेतृत्व एक बेहद वरिष्ठ सांसद द्वारा किए जाने की चर्चा है, जो काफी समय से पार्टी में खुद को दरकिनार किए जाने से नाराज चल रहे हैं। टीएमसी के 18 सांसद दिल्ली भी आएंगे, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
बगावत के मुख्य कारण और आंतरिक कलह
इस संभावित टूट की एक अहम वजह अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों द्वारा वरिष्ठ टीएमसी सांसदों के प्रति किए गए व्यवहार और अनादर को माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पुराने और अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज किए जाने की खबरें लंबे समय से आ रही थीं। सूत्रों का कहना है कि 4 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही कुछ टीएमसी सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं। यह असंतोष अब एक संगठित विद्रोह का रूप लेता दिख रहा है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी के भीतर उनके अनुभव की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण वे अब अलग रास्ता चुनने पर विचार कर रहे हैं।
संसदीय संख्या बल और वफादारी का गणित
लोकसभा में वर्तमान में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। यदि 18 सांसद अलग गुट बनाते हैं, तो यह पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी क्षति होगी। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि टीएमसी के राज्यसभा दल में फिलहाल किसी तरह की टूट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं और उनमें से अधिकतर ममता बनर्जी के प्रति वफादार माने जाते हैं। ये सांसद शायद ही ममता बनर्जी के खिलाफ कोई कदम उठाएं और लेकिन लोकसभा सांसदों का दिल्ली आना और एक नया समूह बनाने की तैयारी करना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
विधायक दल में पहले ही हो चुकी है बड़ी टूट
बंगाल में तृणमूल विधायक दल पहले ही दो हिस्सों में बंट चुका है। विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों का एक बागी गुट खुद को 'असली' तृणमूल बता रहा है। इस गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया है और विधानसभा अध्यक्ष से इसकी मंजूरी भी ले ली है। इस गुट ने ममता बनर्जी के खिलाफ खुलकर बगावत की है और विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर ममता बनर्जी की पसंद को चुनौती दी है। चुनाव में हार के बाद से ही यह बगावत पनप रही थी। कई नेताओं ने भ्रष्टाचार और आरजी कर रेप-मर्डर केस से निपटने के तरीके जैसे मुद्दों पर पार्टी की कड़ी आलोचना की है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई बैठक में भी कई नेता शामिल हुए थे।
ऋतब्रत बनर्जी का दावा और भविष्य की राह
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा। उन्होंने भरोसा जताया कि जिस बागी टीएमसी गुट की वे अगुवाई कर रहे हैं, उसे मिलने वाला समर्थन समय के साथ 'बढ़ता ही जाएगा'। ऋतब्रत बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी की पार्टी में भारी उथल-पुथल मची हुई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के विधायकों के एक बड़े हिस्से का समर्थन हासिल है और आने वाले समय में समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या और बढ़ेगी। यह स्थिति दर्शाती है कि टीएमसी के भीतर असंतोष की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं और इसका असर अब दिल्ली तक पहुंचने वाला है।