डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने चीन से मिले तोहफे कूड़ेदान में फेंके, जासूसी का डर

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने चीन से मिले तोहफे कूड़ेदान में फेंके, जासूसी का डर
विज्ञापन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल ने अपनी हालिया दो दिवसीय चीन यात्रा के दौरान एक ऐसा कदम उठाया जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। बीजिंग से रवानगी के वक्त, अमेरिकी टीम ने चीन द्वारा दिए गए सभी उपहारों, बैज और अन्य स्मृति चिन्हों को एयर फ़ोर्स वन विमान में ले जाने के बजाय वहीं पास के कूड़ेदान में फेंक दिया। यह घटना अमेरिका और चीन के बीच गहरे अविश्वास और जासूसी के डर को उजागर करती है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ कई अहम मुद्दों पर बातचीत की थी, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते उन्होंने चीन की किसी भी वस्तु को अपने साथ ले जाना उचित नहीं समझा।

व्यापारिक समझौते और खाली हाथ वापसी

राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार और दुर्लभ खनिजों पर ठोस समझौते हासिल करने की बड़ी उम्मीदों के साथ चीन पहुंचे थे। हालांकि सोयाबीन और बोइंग विमानों पर कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, लेकिन कई बड़े मुद्दों पर ट्रंप बीजिंग से खाली हाथ ही लौटे। शुक्रवार को जब ट्रंप और उनकी टीम अपने एयर फ़ोर्स वन विमान की ओर बढ़ी, तो उनके पास कोई भी चीनी उपहार नहीं था। व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और अमेरिकी पत्रकारों सहित पूरे प्रतिनिधिमंडल को जो भी उपहार या आधिकारिक वस्तुएं चीन की तरफ से दी गई थीं, उन्हें विमान के पास रखे कूड़ेदान के हवाले कर दिया गया।

कूड़ेदान में फेंके गए सामान की सूची

इस पूरी घटना की जानकारी न्यूयॉर्क पोस्ट की व्हाइट हाउस संवाददाता एमिली गुडिन ने साझा की और उन्होंने बताया कि अमेरिकी कर्मचारियों ने चीनी अधिकारियों द्वारा दी गई हर छोटी-बड़ी चीज को इकट्ठा किया। इसमें पहचान पत्र (ID Badges), व्हाइट हाउस के कर्मचारियों को दिए गए बर्नर फोन, प्रेस के निमंत्रण पत्र और अन्य यादगार वस्तुएं शामिल थीं। एमिली गुडिन के ट्वीट के अनुसार, इन सभी चीजों को एयर फ़ोर्स वन में चढ़ने से पहले सीढ़ियों के नीचे रखे एक कूड़ेदान में फेंक दिया गया। सुरक्षा नियमों के तहत विमान में चीन से मिली किसी भी वस्तु को लाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

साइबर सुरक्षा और जासूसी का खतरा

इस सख्त कदम के पीछे का मुख्य कारण जासूसी और साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं और वाशिंगटन रवाना होने से पहले ट्रंप ने खुद यह स्वीकार किया कि अमेरिका और चीन एक-दूसरे की जासूसी करते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर था कि चीन द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या यहां तक कि साधारण दिखने वाले बैज में भी चिप या ट्रैकिंग डिवाइस हो सकते हैं। इसी सावधानी के चलते, ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में शामिल एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग और एलन मस्क जैसे दिग्गजों ने भी अपने निजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अमेरिका में ही छोड़ दिए थे। उन्होंने ऐसा संभावित हैकिंग और डेटा चोरी से बचने के लिए किया था।

पुरानी रणनीति का सार्वजनिक प्रदर्शन

बीजिंग में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के लिए इस तरह की सावधानी बरतना कोई नई बात नहीं है। दशकों से अमेरिकी अधिकारी चीन यात्रा के दौरान इसी तरह की रणनीति अपनाते आ रहे हैं, जहां वे हर उपहार और उपकरण को संदेह की दृष्टि से देखते हैं और लेकिन इस बार यह सब सार्वजनिक रूप से हुआ, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा। यह घटना दर्शाती है कि भले ही दोनों देश व्यापार और कूटनीति के मंच पर साथ दिखें, लेकिन तकनीकी और सुरक्षा के मोर्चे पर उनके बीच की खाई बहुत गहरी है। चीन से मिली हर चीज को कूड़ेदान में फेंकना एक स्पष्ट संदेश था कि अमेरिका अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

विज्ञापन