उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों हलचल मची हुई है और हाल ही में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद अब अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। हालांकि, इस इस्तीफे के पीछे की कहानी जितनी सीधी दिख रही है, उतनी है नहीं। प्रशांत सिंह के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस पूरे घटनाक्रम को एक नया मोड़ दे दिया है।
फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने का सनसनीखेज आरोप
प्रशांत सिंह के बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने दावा किया है कि उनके भाई ने सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया और उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत ने नेत्र विकलांगता का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था। इस सर्टिफिकेट में खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन दर्शाया गया था, जिसके आधार पर उन्हें आरक्षण का लाभ मिला और वह पीसीएस अधिकारी बन सके और विश्वजीत सिंह का कहना है कि प्रशांत पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्होंने केवल सिस्टम को धोखा देने के लिए यह फर्जीवाड़ा किया है।
जांच से बचने के लिए इस्तीफे का नाटक?
डॉ. विश्वजीत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशांत सिंह के खिलाफ फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और जन्मतिथि में हेरफेर को लेकर जांच पहले से ही अंतिम चरण में है। जांच के दौरान प्रशांत को दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह एक बार भी उपस्थित नहीं हुए। भाई का आरोप है कि जब प्रशांत को लगा कि अब वह पकड़े जाएंगे, तो उन्होंने खुद को पाक-साफ दिखाने और सहानुभूति बटोरने के लिए मुख्यमंत्री के समर्थन में इस्तीफे का नाटक रचा है।
राजनीति से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
प्रशांत कुमार सिंह का प्रशासनिक सेवा में आने का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। साल 2013 में पीसीएस अधिकारी बनने से पहले वह सक्रिय राजनीति में थे। वह पूर्व राज्यसभा सांसद अमर सिंह की पार्टी के मऊ जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और एक राजनेता से सीधे प्रशासनिक अधिकारी बनने के उनके सफर ने उस समय भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उनकी पहली पोस्टिंग सहारनपुर में हुई थी, जिसके बाद वह विभिन्न पदों पर रहे।
शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रशांत सिंह मूल रूप से मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के सरवा गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1978 को हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा मऊ के जीवन राम इंटर कॉलेज से हुई, जहां से उन्होंने हाईस्कूल पास किया। इसके बाद उन्होंने टांडा के विद्युत परिषद स्कूल से 12वीं और वाराणसी के उदय प्रताप महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली। उन्होंने आजमगढ़ के शिबली कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की है। उनके गांव के लोग इस इस्तीफे की खबर से हैरान हैं, हालांकि उनके परिवार का कोई भी सदस्य अब गांव में नहीं रहता है।
यूपी में अफसरों के इस्तीफे और सियासी माहौल
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में अफसरों के इस्तीफे ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। पहले अलंकार अग्निहोत्री और अब प्रशांत सिंह के इस्तीफे को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है और हालांकि, प्रशांत सिंह के मामले में उनके सगे भाई द्वारा लगाए गए आरोपों ने मामले को पूरी तरह से बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि शासन इस इस्तीफे को स्वीकार करता है या फिर फर्जीवाड़े के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।