अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं क्योंकि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय नाविकों को ले जा रहे एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है। इस हालिया घटनाक्रम में 27 भारतीय नागरिकों को ले जा रहे एक तेल टैंकर पर दो सी माइंस के जरिए खतरनाक हमला किया गया है जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस अप्रत्याशित और खतरनाक हमले के परिणामस्वरूप जहाज के इंजन रूम में भीषण आग लग गई लेकिन गनीमत यह रही कि सभी नाविक पूरी तरह से सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरी नजर रखी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार के दिन 27 भारतीय नागरिकों को अपने साथ लेकर यात्रा कर रहे एक तेल टैंकर पर यह हमला अंजाम दिया गया। पनामा के झंडे के तहत संचालित होने वाले इस महत्वपूर्ण जहाज का नाम एमटी लुईस 1 है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था जिसमें एक छोटी नाव का इस्तेमाल करते हुए जहाज के निचले हिस्से पर दो लिम्पेट माइंस सफलतापूर्वक लगाई गईं। आपको बता दें कि लिम्पेट माइंस मूल रूप से ऐसी विशेष प्रकार की सी माइंस होती हैं जिन्हें बड़ी चालाकी से जहाज के बाहरी हिस्से से चिपका दिया जाता है और फिर दूर से या समय तय करके इनमें भयानक धमाका किया जाता है। इन खतरनाक माइंस में जब अचानक जोरदार धमाका हुआ तो इसके प्रभाव से जहाज के संवेदनशील इंजन रूम में आग भड़क उठी। इंजन रूम में आग लगने के इस गंभीर संकट के कारण कुछ समय के लिए जहाज का संपूर्ण कामकाज और परिचालन पूरी तरह से रुक गया जिससे चालक दल के सदस्यों की सांसे अटक गईं।
हालांकि इस विकट और खतरनाक परिस्थिति के बावजूद जहाज पर मौजूद अत्यंत प्रशिक्षित कर्मचारियों ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत कार्रवाई की और अपनी जान की परवाह न करते हुए आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया और उसे बुझा दिया। इस पूरी घटना की सबसे राहत भरी बात यह रही कि इस भयंकर हादसे के दौरान जहाज पर मौजूद किसी भी कर्मचारी या नाविक को एक खरोंच तक नहीं आई और सभी पूरी तरह सुरक्षित बचे रहे। इसके अलावा एक अन्य बड़ी दुर्घटना टल गई क्योंकि इस हमले के बाद समुद्र के पानी में किसी भी प्रकार का तेल नहीं फैला जिससे एक संभावित बड़े पर्यावरणीय灾難 या प्रदूषण को भी आसानी से टाल दिया गया। आग पर पूरी तरह से काबू पाने और स्थिति के सामान्य होने के बाद इस तेल टैंकर ने अपनी यात्रा को एक बार फिर से शुरू कर दिया और वह अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ गया।
ब्रिटेन की प्रतिष्ठित समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह पूरा हमला ओमान के खासाब शहर से 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व की दिशा में समुद्र के भीतर घटित हुआ। इस घटना के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो फरवरी महीने में इस क्षेत्र में युद्ध की शुरुआत होने के बाद से लेकर अब तक होर्मुज स्ट्रेट के इस संवेदनशील पानी में लिम्पेट माइंस के जरिए किसी भी व्यापारिक जहाज पर हमला करने की यह पहली सफल घटना दर्ज की गई है। इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि इस समुद्री मार्ग पर नौकायन करने वाले जहाजों के लिए खतरा कितना अधिक गंभीर और वास्तविक बन चुका है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने की अत्यंत आवश्यकता महसूस हो रही है।
रॉयटर्स से मिली अतिरिक्त जानकारियों के अनुसार इस विशिष्ट इलाके में लिम्पेट माइंस के इस्तेमाल का इतिहास काफी पुराना है क्योंकि इस क्षेत्र में इस तरह के हथियारों के प्रयोग की पहली घटना साल 2017 में सामने आई थी। उस शुरुआती घटना के बाद भी कई बार इस प्रमुख रास्ते से गुजरने वाले विभिन्न देशों के तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को अपना निशाना बनाने के लिए इन्हीं खतरनाक माइंस का बार-बार इस्तेमाल किया जाता रहा है। ग्रीस देश की एक प्रमुख समुद्री सुरक्षा कंपनी मेरिस्क्स ने इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार की माइंस बहुत सस्ती होती हैं और काले बाजार या अन्य माध्यमों से आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। कंपनी के विशेषज्ञों के अनुसार एक साधारण और छोटी नाव से गुजरते हुए किसी भी बड़े और गतिशील जहाज पर इस तरह की माइंस को आसानी से चिपका देना एक बहुत ही आसान, कम खर्चीला और साथ ही बेहद असरदार तरीका साबित होता है जिससे हमलावर आसानी से अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे देते हैं।
इस दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना से ठीक एक दिन पहले भी एक अन्य बड़े तेल टैंकर पर इसी प्रकार का हमला होने की सनसनीखेज खबर सामने आई थी। इस दूसरी घटना में लाइबेरिया के झंडे वाले एक बड़े और भारी तेल टैंकर जिसका नाम एमटी अरजनाह है, को निशाना बनाया गया था। इस दूसरे जहाज पर भी दो भारतीय नागरिक सवार थे जो अपनी सेवाएं दे रहे थे और उस जहाज पर भी किसी अज्ञात वस्तु या हथियार के जरिए जोरदार हमला किया गया था जिससे उसकी सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा गया था। जब से फरवरी के महीने में अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष की शुरुआत हुई है, तब से लेकर लगातार होर्मुज स्ट्रेट के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों की संख्या में काफी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। ईरान द्वारा इस रास्ते से गुजरने के तय नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए लगातार कई जहाजों को अपना निशाना बनाया गया है। इस तरह के लगातार हमलों के जरिए ईरान असल में इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपना पूर्ण नियंत्रण और वर्चस्व साबित करना चाहता है तथा साथ ही इसके माध्यम से अमेरिका पर कूटनीतिक और सामरिक दबाव बनाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार की तरफ से भी अत्यंत कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया गया है। देश के केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस गंभीर मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आधिकारिक तौर पर कहा है कि सभी भारतीय नाविक पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में किसी भी भारतीय को कोई चोट नहीं आई है और उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए बताया कि केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम और क्षेत्र के ताजा हालातों पर बेहद बारीकी से और लगातार नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही सरकार जहाज का संचालन करने वाली संबंधित कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे सभी भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल में किसी भी प्रकार की कोई कमी या कोताही न बरती जाए। सरकार की यह त्वरित और संवेदनशील प्रतिक्रिया नाविकों के परिवारों के लिए एक बड़ा संबल साबित हुई है जो लगातार अपनों की सलामती की दुआ कर रहे थे।
