पाकिस्तान में एंबुलेंस सिलेंडर फटा, 10 लोगों की दर्दनाक मौत, पढ़ें पूरी रिपोर्ट विस्तार से

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से प्रसूता समेत 10 लोगों की मौत हो गई। देश में लगातार हो रहे अन्य हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बेहद दहला देने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक एंबुलेंस के भीतर ऑक्सीजन सिलेंडर में हुए भीषण विस्फोट के कारण कम से कम 10 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। यह भयावह हादसा पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित थारपारकर जिले के नगरपारकर इलाके में गुरुवार के दिन पेश आया। इस दुर्घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक जीवन बचाने वाली एंबुलेंस स्वयं ही कई जिंदगियों के लिए काल बन गई।

प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय शुरू हुई जब सिंध प्रांत के दानो धंधल में स्थित एक बुनियादी स्वास्थ्य केंद्र से एक महिला मरीज को बेहतर और उच्च स्तरीय चिकित्सा देखभाल के लिए जिला अस्पताल मीठी ले जाया जा रहा था और संबंधित महिला का हाल ही में प्रसव हुआ था, जिसके बाद उसे प्रसवोत्तर जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था। इन गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय चिकित्सा कर्मियों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल मीठी रेफर करने का निर्णय लिया था, ताकि उसकी जान बचाई जा सके और लेकिन किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि अस्पताल का सफर उस महिला और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों के लिए अंतिम सफर साबित होगा।

पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जब एंबुलेंस अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी, तब वाहन के भीतर चालक द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर को इधर-उधर खिसकाया जा रहा था। इसी दौरान सिलेंडर में अचानक भीषण विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि एंबुलेंस के परखच्चे उड़ गए और वाहन के भीतर सवार किसी भी व्यक्ति को संभलने का मौका तक नहीं मिला। थारपारकर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) आरिफ अजीज जाफरी ने मीडिया को इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक इस भीषण दुर्घटना में कुल 10 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में वह दुर्भाग्यशाली महिला भी शामिल है, जिसे प्रसव के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ अजीज जाफरी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि आखिर सिलेंडर में विस्फोट किन तकनीकी कारणों से हुआ और क्या एंबुलेंस के भीतर ऑक्सीजन सिलेंडर के रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थी या नहीं। इस घटना के बाद से स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्वास्थ्य केंद्रों से गंभीर मरीजों को ले जाने वाली गाड़ियों में इस तरह की लापरवाही और तकनीकी खामियों ने चिकित्सा परिवहन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

पाकिस्तान में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार सामने आ रहे हादसों की श्रृंखला में यह अपनी तरह की एक और बड़ी त्रासदी है और इस घटना से ठीक पहले पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के राजनपुर में एक अन्य अत्यंत भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई थी। उस सड़क हादसे में एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी, जिसके परिणामस्वरूप मौके पर ही 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह यात्री बस कराची से चलकर डेरा गाजी खान की ओर जा रही थी और रास्ते में निर्माण कार्य वाले राजमार्ग पर बने डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

राजनपुर के उस सड़क हादसे में मरने वालों में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे। पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा रेस्क्यू 1122 से प्राप्त आंकड़ों और बयानों के अनुसार, मौके पर मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों ने आशंका जताई थी कि बस बेहद तेज रफ्तार में चलाई जा रही थी, हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस हादसे में घायल हुए सभी लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज अभी भी जारी है। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने राजनपुर में हुए इस बस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया था और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिए थे कि घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता और राहत पहुंचाई जाए। उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा था कि इस भीषण हादसे के लिए जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

इन दोनों बड़ी घटनाओं से लगभग एक सप्ताह पहले ही पेशावर से भी एक अत्यंत हृदय विदारक दुर्घटना की खबर सामने आई थी। पेशावर में एक निजी स्कूल की इमारत की छत अचानक भरभरा कर गिर गई थी, जिसके मलबे में दबने से कुल 30 लोगों की मौत हो गई थी। इस भीषण स्कूल हादसे में जान गंवाने वालों में 29 मासूम बच्चे शामिल थे, जिनकी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस बेहद दुखद घटना पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गहरा शोक व्यक्त किया था और अपनी संवेदनाएं प्रकट की थीं।

लगातार सामने आ रही इन दर्दनाक घटनाओं और त्रासदियों ने पाकिस्तान के भीतर आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के रखरखाव और सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चाहे वह स्वास्थ्य सेवाओं के परिवहन के दौरान एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने की घटना हो, राजमार्गों पर तेज रफ्तार और निर्माण कार्य के बीच होने वाले सड़क हादसे हों, या फिर स्कूलों की जर्जर इमारतें गिरने से मासूम बच्चों की मौत का मामला हो, इन सभी ने देश में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा दी हैं। आम जनता अब सरकार और प्रशासन से इन मामलों में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है ताकि भविष्य में इस तरह की बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सके।