ChatGPT और Gemini को न बताएं ये राज, वरना पछताएंगे! एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनी

क्या आप भी चैटजीपीटी या जेमिनी से अपनी बीमारी का इलाज पूछ रहे हैं? सावधान! आपकी एक छोटी सी गलती आपकी प्राइवेसी को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है। एक्सपर्ट्स ने मेडिकल डेटा शेयर करने को लेकर बड़ी चेतावनी दी है।

आज के डिजिटल युग में चैटजीपीटी (ChatGPT), गूगल जेमिनी (Google Gemini) और एलन मस्क का ग्रोक (Grok) हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। लोग ऑफिस के काम से लेकर निजी सलाह तक के लिए इन एआई टूल्स पर निर्भर हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपको भारी मुसीबत में डाल सकती है? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इन चैटबॉट्स के साथ अपनी बेहद निजी जानकारियां, खासकर मेडिकल रिपोर्ट्स शेयर करना 'लाइफ थ्रेटनिंग' यानी जानलेवा साबित हो सकता है।

23 करोड़ लोग मांग रहे हैं सेहत की सलाह

ओपनएआई (OpenAI) द्वारा जारी की गई एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, हर सप्ताह लगभग 230 मिलियन यानी 23 करोड़ यूजर्स चैटजीपीटी से हेल्थ और वेलनेस से जुड़ी सलाह मांग रहे हैं। लोग अपनी बीमारी के लक्षण, दवाइयों के नाम और यहां तक कि अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री इन चैटबॉट्स को बता रहे हैं। इसमें इंश्योरेंस पेपर्स, लैब टेस्ट के नतीजे और डायग्नोसिस रिपोर्ट शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा इतना संवेदनशील है कि। इसका गलत इस्तेमाल आपकी पूरी जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।

क्या वाकई सुरक्षित है आपका डेटा?

ओपनएआई ने हाल ही में 'चैटजीपीटी हेल्थ' नाम का एक प्लेटफॉर्म पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यूजर्स द्वारा दी गई मेडिकल जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसे एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसी तरह एंथ्रोपिक (Anthropic) ने भी 'क्लाउड' (Claude) नाम का टूल पेश किया है जो स्वास्थ्य संबंधी सलाह देता है और हालांकि, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स इन दावों पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क है कि कंपनियां अपनी प्राइवेसी पॉलिसी कभी भी बदल सकती हैं। एक बार डेटा सर्वर पर चला गया, तो उसे पूरी तरह डिलीट करना लगभग असंभव होता है।

एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं चेतावनी?

द वर्ज (The Verge) की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अपने मॉडल्स को बेहतर बनाना है। इसके लिए उन्हें भारी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है। अगर भविष्य में ये कंपनियां अपनी नीतियों में बदलाव करती हैं, तो आपके द्वारा शेयर की गई मेडिकल हिस्ट्री का इस्तेमाल एआई को ट्रेनिंग देने के लिए किया जा सकता है और इसके अलावा, डेटा ब्रीच या हैकिंग की स्थिति में आपकी निजी जानकारी डार्क वेब पर बेची जा सकती है, जिससे इंश्योरेंस कंपनियां आपके प्रीमियम बढ़ा सकती हैं या आपको नौकरी मिलने में दिक्कत आ सकती है।

भूलकर भी न करें ये गलतियां

अगर आप एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कुछ बातों का खास ख्याल रखें। कभी भी अपना नाम, पता, फोन नंबर या आधार जैसी जानकारी चैटबॉट को न दें। अपनी मेडिकल रिपोर्ट्स की पीडीएफ फाइल अपलोड करने से बचें। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या है, तो एआई के बजाय किसी प्रमाणित डॉक्टर से ही सलाह लें और एआई केवल एक सहायक उपकरण है, यह डॉक्टर का विकल्प नहीं हो सकता। अपनी प्राइवेसी को सुरक्षित रखना आपके अपने हाथ में है।

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