आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी ओपनएआई ने भारत में अपने यूजर बेस को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चैटजीपीटी का उपयोग करने वालों में 18 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। इस आयु वर्ग के उपयोगकर्ता देश में भेजे जाने वाले कुल संदेशों में लगभग 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। यदि 30 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ताओं की बात की जाए, तो उनकी कुल गतिविधि लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत का युवा वर्ग एआई तकनीकों को अपनाने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ओपनएआई के अनुसार, भारत अब उसके लिए सबसे तेजी से बढ़ते प्रमुख बाजारों में से एक बन गया है।
युवाओं के बीच एआई की बढ़ती लोकप्रियता और भागीदारी
भारत में डिजिटल क्रांति के बीच युवाओं ने एआई टूल्स को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बना लिया है। ओपनएआई की रिपोर्ट के अनुसार, 18-24 आयु वर्ग के उपयोगकर्ता न केवल मनोरंजन बल्कि शैक्षणिक और रचनात्मक कार्यों के लिए भी चैटजीपीटी का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। 30 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ताओं की 80 प्रतिशत भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत की नई पीढ़ी तकनीकी रूप से अत्यधिक जागरूक है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय बाजार में जिस गति से एआई को स्वीकार किया गया है, वह अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक है। यह प्रवृत्ति भारत के डिजिटल भविष्य और एआई संचालित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
व्यावसायिक और शैक्षणिक कार्यों में चैटजीपीटी का उपयोग
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भारत से भेजे जाने वाले लगभग 35 प्रतिशत संदेश पेशेवर या काम से संबंधित होते हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत से अधिक है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय पेशेवर अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं और उपयोगकर्ता मुख्य रूप से कंटेंट राइटिंग, डेटा रिसर्च, ऑफिस टास्क और जटिल समस्याओं के समाधान के लिए चैटजीपीटी का उपयोग कर रहे हैं। पेशेवर कार्यों के अलावा, बड़ी संख्या में छात्र अपनी पढ़ाई, प्रोजेक्ट वर्क और नई भाषाएं सीखने के लिए भी इस टूल का उपयोग कर रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि एआई अब केवल एक प्रयोग नहीं रह गया है, बल्कि यह कार्यस्थल और शिक्षा के क्षेत्र में एक अनिवार्य उपकरण बनता जा रहा है।
कोडिंग और सॉफ्टवेयर विकास में भारत की वैश्विक बढ़त
ओपनएआई ने विशेष रूप से भारतीय डेवलपर्स द्वारा कोडिंग असिस्टेंट 'कोडेक्स' (Codex) के उपयोग पर प्रकाश डाला है और रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कोडेक्स की साप्ताहिक उपयोग दर वैश्विक औसत से काफी अधिक है। भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और छात्र कोडिंग से जुड़े जटिल सवालों के समाधान और प्रोग्रामिंग में सहायता के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं। एंथ्रोपिक जैसी अन्य एआई कंपनियों की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि भारत में एआई कार्यों का एक बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और तकनीकी नवाचार से जुड़ा है और यह देश के विशाल डेवलपर समुदाय और वैश्विक आईटी क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति को और अधिक सशक्त बना रहा है।
भारत में ओपनएआई की विस्तार योजनाएं और रणनीतिक साझेदारी
भारत की बढ़ती क्षमता को देखते हुए ओपनएआई ने देश में अपनी उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है और कंपनी इस वर्ष मुंबई और बेंगलुरु में अपने नए कार्यालय खोलने की प्रक्रिया में है। इसके साथ ही, ओपनएआई ने टाटा समूह के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है, जिसका उद्देश्य भारत में एआई कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाना है। टीसीएस (TCS) के माध्यम से 'चैटजीपीटी एंटरप्राइज' को भारतीय कॉर्पोरेट जगत में बढ़ावा दिया जा रहा है। कंपनी पाइन लैब्स, इक्सिगो, मेकमायट्रिप और इटरनल जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। आने वाले वर्षों में, ओपनएआई की योजना एक लाख से अधिक छात्रों तक अपने एआई टूल्स और प्रशिक्षण को पहुंचाने की है।
तकनीकी लागत में गिरावट और व्यापक पहुंच की संभावना
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के अनुसार, पिछले 14 महीनों में एआई के माध्यम से जटिल प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने की लागत में 1000 गुना से अधिक की कमी आई है। लागत में यह भारी गिरावट भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, जहां बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और एआई समाधानों की आवश्यकता है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे एआई तकनीक अधिक किफायती और सुलभ होगी, भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव बढ़ेगा। वर्तमान में कंपनी भारतीय भाषाओं में एआई की दक्षता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि भाषाई बाधाओं को दूर किया जा सके और अधिक से अधिक लोग इस तकनीक का लाभ उठा सकें।
