रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' ने भारतीय टेलीविजन इतिहास में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे आज भी कोई अन्य शो नहीं छू सका है। इस धारावाहिक के हर पात्र को दर्शकों ने भगवान की तरह पूजा। जहां अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया को राम-सीता के रूप में पहचान मिली, वहीं कुछ ऐसे कलाकार भी थे जिन्होंने अपने छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदारों से अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं में से एक नाम है अभिनेता बशीर खान का, जिन्होंने 'रामायण' में बाली पुत्र अंगद की भूमिका निभाई थी और आज बशीर खान चकाचौंध भरी दुनिया से पूरी तरह दूर हो चुके हैं और गुमनामी में अपना जीवन बिता रहे हैं।
रामायण में अंगद के किरदार की ऐतिहासिक सफलता
बशीर खान ने 'रामायण' में किष्किंधा के राजकुमार और राजा बाली के पुत्र अंगद का किरदार निभाया था। अंगद का पात्र रामायण के युद्ध में अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह भगवान राम के दूत बनकर रावण की सभा में शांति प्रस्ताव लेकर गए थे। बशीर खान ने इस किरदार को इतनी जीवंतता और गंभीरता के साथ निभाया कि वह घर-घर में प्रसिद्ध हो गए। उनके भारी स्वर और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने अंगद के चरित्र को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उस दौर में जब 'रामायण' का प्रसारण होता था, तो बशीर खान की लोकप्रियता किसी मुख्य अभिनेता से कम नहीं थी।
रावण की सभा का वह यादगार दृश्य
बशीर खान द्वारा निभाया गया सबसे यादगार दृश्य रावण की सभा का है, जहां वह अपना पैर जमा देते हैं और पौराणिक कथा के अनुसार, अंगद ने रावण के दरबार में चुनौती दी थी कि यदि कोई उनका पैर हिला देगा, तो श्री राम हार स्वीकार कर लेंगे। बशीर खान ने इस दृश्य में जो आत्मविश्वास और शौर्य दिखाया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। यह दृश्य आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रतिष्ठित दृश्यों में गिना जाता है। इस एक सीन ने बशीर खान को रातों-रात एक बड़े स्टार के रूप में स्थापित कर दिया था और लोग उन्हें असल जीवन में भी अंगद के रूप में सम्मान देने लगे थे।
पौराणिक धारावाहिकों और फिल्मों में अभिनय का सफर
'रामायण' की अपार सफलता के बाद बशीर खान को कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने का अवसर मिला। आर. चोपड़ा की 'महाभारत' और रामानंद सागर के ही एक अन्य प्रसिद्ध शो 'श्री कृष्णा' में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने केवल छोटे पर्दे तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कई बॉलीवुड फिल्मों में भी अपने अभिनय का प्रदर्शन किया। उनकी अभिनय क्षमता की सराहना हर जगह हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मिलने वाले किरदारों की संख्या कम होने लगी। पौराणिक किरदारों में टाइपकास्ट होने की वजह से उन्हें समकालीन कहानियों में जगह बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
अभिनय से दूरी और वर्तमान स्थिति की अनिश्चितता
पिछले कई वर्षों से बशीर खान मनोरंजन जगत से पूरी तरह गायब हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक समय के बाद उन्हें काम मिलना बंद हो गया था और उन्होंने अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया और वर्तमान में वह कहां हैं और किस हाल में हैं, इसके बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। कुछ अपुष्ट खबरों के अनुसार, वह अपने निजी जीवन में व्यस्त हैं और लाइमलाइट से दूर एक साधारण जीवन जी रहे हैं। मनोरंजन उद्योग की बदलती प्रवृत्तियों और नए कलाकारों के आगमन के बीच, बशीर खान जैसे मंझे हुए कलाकार धीरे-धीरे विस्मृति के अंधेरे में चले गए।
वीरेंद्र सहवाग और प्रशंसकों की यादों में जीवित किरदार
भले ही बशीर खान आज पर्दे पर नजर नहीं आते, लेकिन प्रशंसकों के दिलों में उनकी जगह बरकरार है। साल 2020 में कोरोना काल के दौरान जब 'रामायण' का पुनः प्रसारण हुआ, तो बशीर खान एक बार फिर चर्चा में आए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने सोशल मीडिया पर अंगद के पैर जमाने वाले दृश्य की तस्वीर साझा की थी। सहवाग ने लिखा था कि उन्हें अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा यहीं से मिली थी, क्योंकि अंगद का पैर हिलाना नामुमकिन था। इस पोस्ट ने साबित कर दिया कि बशीर खान का अभिनय आज की पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
