राजपाल यादव को मिली अंतरिम जमानत, 9 करोड़ के लोन मामले में रिहा

अभिनेता राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। 12 दिन जेल में बिताने के बाद उन्हें भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए रिहा किया गया है। उन्हें 1.5 करोड़ रुपये जमा करने और पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।

मशहूर बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये के ऋण चूक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 12 रातें जेल में बिताने के बाद, उन्हें मंगलवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था, जिसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने रिहाई वारंट जारी किया और राजपाल यादव को यह राहत उनके परिवार में होने वाली एक शादी में शामिल होने के लिए दी गई है।

अदालती आदेश और जमानत की अनिवार्य शर्तें

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें रखी हैं। 50 करोड़ की राशि जमा करने का आदेश दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, राजपाल यादव ने सोमवार दोपहर 3 बजे से पहले ही यह राशि जमा करा दी और इसकी जानकारी अदालत को साझा की। इसके अतिरिक्त, अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी निर्देश दिया है ताकि वे बिना अनुमति देश से बाहर न जा सकें। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है, जिसमें राजपाल यादव को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।

भतीजी की शादी के लिए मिली अंतरिम राहत

राजपाल यादव की रिहाई का मुख्य आधार उनके परिवार में होने वाला मांगलिक कार्यक्रम बना। उनकी भतीजी की शादी 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में तय है। अभिनेता के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि परिवार के मुखिया के तौर पर उनका शादी में शामिल होना आवश्यक है। इस दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की। जेल से बाहर आने के बाद उनके भाई ने मीडिया को बताया कि परिवार के लिए यह बड़ी राहत की बात है और शादी की खुशियां अब दोगुनी हो गई हैं। इस कठिन समय में उनकी पत्नी राधा यादव और उनके भाई लगातार कानूनी प्रक्रिया में उनके साथ खड़े रहे।

9 करोड़ रुपये के कर्ज का ऐतिहासिक घटनाक्रम

इस कानूनी विवाद की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए दिल्ली स्थित एक कंपनी, मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। साल 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिसके कारण अभिनेता वित्तीय संकट में घिर गए। ऋण अदायगी के लिए दिए गए सात चेक बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद ऋणदाता कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। समय के साथ ब्याज जुड़ने के कारण यह बकाया राशि बढ़कर ₹9 करोड़ तक पहुंच गई।

कानूनी कार्यवाही और पूर्व की सजा का विवरण

साल 2018 में, कड़कड़डूमा स्थित एक मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया था। उस समय उन्हें छह महीने के कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी, लेकिन उन्हें कोई स्थायी राहत नहीं मिली और अदालती आदेशों के उल्लंघन और भुगतान में देरी के कारण उन्हें पहले भी तिहाड़ जेल में समय बिताना पड़ा था। हालिया घटनाक्रम में, अदालत ने उन्हें 6 फरवरी 2026 को दोबारा सरेंडर करने का भी निर्देश दिया है, जो उनके भविष्य की कानूनी चुनौतियों को दर्शाता है। वर्तमान में, 18 मार्च की सुनवाई इस मामले की अगली दिशा तय करेगी।

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