अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर एक बेहद दिलचस्प और गंभीर राजनीतिक व सामाजिक लड़ाई का दौर शुरू हो चुका है। एक तरफ जहां तमाम कंपनियां एआई तकनीक का इस्तेमाल करके अपने काम को बेहद तेजी से पूरा करने और परिचालन खर्चों में भारी कटौती करने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने और बिजली तथा पानी की भारी खपत बढ़ने को लेकर आम जनता के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। अब इस सुलगती हुई नाराजगी का सीधा असर अमेरिकी राजनीति पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जिससे आने वाले समय में तकनीकी कंपनियों की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ सकती हैं।
हाल ही में संपन्न हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक बड़ी और शानदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपना स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। इसके अलावा टेक्सास, जॉर्जिया, ओहायो और नेवादा जैसे प्रमुख राज्यों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने गवर्नर पद के चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की है। सबसे खास और ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कई विजयी उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही खुलकर यह वादा किया था कि वे अपने-अपने राज्यों में विशाल डेटा सेंटर बनाने पर या तो पूरी तरह से रोक लगा देंगे या फिर उनके निर्माण कार्यों को बेहद सीमित कर देंगे और चुनावी वादों के इस नए दौर ने एआई और तकनीकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
एआई के नाम पर एक लाख से अधिक नौकरियां समाप्त
जाने-माने आउटप्लेसमेंट फर्म चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस की ओर से जारी की गई पांच नवंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियों ने जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच कुल 1,21,401 नौकरियों में कटौती करने की आधिकारिक घोषणा की और इसके पीछे की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बताया। यह चौंकाने वाला आंकड़ा कुल 6,17,189 छंटनियों का लगभग बीस प्रतिशत बैठता है। हालांकि, अगर अकेले अक्टूबर महीने की बात करें तो उस दौरान एआई को केवल 1,265 कटौतियों की वजह बताया गया, जो पूरे साल का अब तक का सबसे कम आंकड़ा है।
अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो एआई के नाम पर घोषित की गई कटौतियां साल 2023 में 4,247 थीं, जो साल 2024 में बढ़कर 12,742 हो गईं और साल 2025 में यह आंकड़ा उछलकर 54,836 तक पहुंच गया। इस प्रकार साल 2023 से लेकर अक्टूबर 2026 तक एआई से जुड़ी कुल छंटनियों की यह संख्या बढ़कर 1,93,226 हो गई है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये वे आंकड़े हैं जो कंपनियों ने खुद अपनी ओर से वजह बताते हुए घोषित किए हैं; इसका यह कोई कानूनी प्रमाण नहीं है कि वास्तव में हर एक कर्मचारी की कुर्सी की जगह सीधे तौर पर एआई ने ही ले ली है और रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में बाजार के हालात और व्यापक आर्थिक परिस्थितियां कुल 1,30,531 कटौतियों के साथ एआई से भी बड़ी छंटनी की वजह बनकर उभरीं।
डेटा सेंटर क्यों बन गए हैं चुनावी मुद्दा?
आधुनिक एआई मॉडल को लगातार चलाने और प्रशिक्षित करने के लिए बेहद विशाल डेटा सेंटरों की आवश्यकता होती है और इन केंद्रों के भीतर हजारों की संख्या में शक्तिशाली सर्वर लगे होते हैं, जिन्हें सुचारू रूप से चलाने और लगातार ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की खपत होती है। आम नागरिकों के मन में इस बात का गहरा डर बैठ गया है कि इन विशाल डेटा सेंटरों के कारण उनके घरों के बिजली बिल काफी बढ़ जाएंगे, स्थानीय पानी के स्रोतों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा और पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ेगा और इसके अलावा लोगों को इन परियोजनाओं से मिलने वाले स्थानीय रोजगार के फायदों पर भी गंभीर संदेह है।
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की पांच नवंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 21 चुनावी मुकाबलों में डेटा सेंटर के निर्माण कार्यों को धीमा करने या पूरी तरह रोकने के समर्थन में लगभग नौ करोड़ डॉलर के भारी-भरकम विज्ञापन दिए गए। इसके अलावा एक हालिया सर्वे में लगभग दो-तिहाई अमेरिकी वयस्कों ने यह माना कि एआई के विकास और प्रसार की मौजूदा रफ्तार बहुत ज्यादा तेज है। करीब तीन-चौथाई लोगों ने अपने रिहायशी इलाकों के आसपास नए डेटा सेंटर बनाए जाने का खुलकर विरोध किया। एसोसिएटेड प्रेस यानी एपी के आंकड़ों के अनुसार, बत्तीस विजयी गवर्नर उम्मीदवारों में से बत्तीस उम्मीदवार सख्त नियमों के पुरजोर पक्ष में थे, जबकि बारह ने सीधे तौर पर प्रतिबंध या फिर अस्थायी रोक लगाने का खुलकर समर्थन किया। कई स्थानीय मतदानों में भी डेटा सेंटरों के निर्माण पर रोक लगाने के पक्ष में जनता ने भारी वोट डाले।
टेक्सास, जॉर्जिया और ओहायो में क्या बदल रहा है?
विभिन्न राज्यों में आए राजनीतिक परिणामों के कारण जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। टेक्सास राज्य में डेमोक्रेट उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा गवर्नर ग्रेग एबॉट को चुनावी शिकस्त दी। उन्होंने अपने प्रचार के दौरान यह स्पष्ट किया था कि स्थानीय निवासियों को पूरा फायदा न मिलने और नीतिगत फैसलों में उनकी सीधी भागीदारी न होने की स्थिति में वे इन बड़ी परियोजनाओं की मंजूरियों को रोक देंगी। जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स ने पर्यावरण की रक्षा और बिजली की दरों की गहन समीक्षा किए जाने तक इन परियोजनाओं पर रोक लगाने का समर्थन किया था। ओहायो की एमी एक्टन ने तकनीकी कंपनियों से बिजली और पानी के उपभोग का पूरा खर्च वसूलने और संचालन में पूरी पारदर्शिता बरतने की पुरजोर वकालत की।
प्रसिद्ध वित्तीय संस्थान रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स का यह अनुमान है कि राज्य और स्थानीय स्तर पर लगने वाली अस्थायी रोक के कारण अमेरिका में प्रस्तावित कुल डेटा सेंटर क्षमता विस्तार की लगभग पैंतालीस प्रतिशत परियोजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती हैं और हालांकि यह केवल एक संभावित अनुमान है, न कि पूरी तरह रद्द की जा चुकी परियोजनाओं की अंतिम संख्या। इन चुनावी नतीजों के तुरंत बाद शेयर बाजार पर भी इसका असर दिखा और कोर साइंटिफिक के शेयरों में 11 रुपये 60 पैसे की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईआरईएन के शेयर 12 रुपये 50 पैसे तक लुढ़क गए। निवेशकों के मन में इस बात का गहरा डर बैठ गया है कि प्रशासनिक मंजूरियों में होने वाली इस देरी की वजह से संपूर्ण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला भारी निवेश और खर्च काफी धीमा पड़ जाएगा।
क्या अमेरिका में एआई पर पूरी तरह रोक लग जाएगी?
यह समझना बेहद आवश्यक है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की इस जीत का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। हालांकि, राज्य सरकारें अब स्थानीय मंजूरियों, बिजली और पानी के आवंटन, पर्यावरण संरक्षण और टैक्स से जुड़ी छूट के नियमों को और अधिक सख्त जरूर बना सकती हैं। अमेरिकी कांग्रेस इस पूरे मामले की गहन जांच और आधिकारिक सुनवाई कर सकती है, लेकिन बड़े संघीय कानूनों के स्तर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वीटो इस दिशा में एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद एआई उद्योग के बहुत बड़े समर्थक माने जाते हैं और अमेरिका की यह रणनीतिक प्राथमिकता है कि वह तकनीकी मुकाबले की दौड़ में चीन से हमेशा आगे बना रहे। इसलिए वर्तमान समय में चल रही यह असली लड़ाई एआई तकनीक को पूरी तरह से रोकने की नहीं है, बल्कि इसके व्यावसायिक और ढांचागत विस्तार की कड़ी शर्तें तय करने की है। अब तकनीकी कंपनियों को देश के सामने यह साबित करना होगा कि उनके डेटा सेंटरों से आम स्थानीय नागरिकों को असल में क्या फायदा पहुंच रहा है और इन भारी संसाधनों पर आने वाले भारी-भरकम खर्च का वहन कौन करेगा। आगामी महीनों में यह बहस अमेरिकी तकनीक और राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
