अमित शाह का उत्तर बंगाल दौरा: सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा पर केंद्र की पैनी नजर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर उत्तर बंगाल पहुंचे हैं, जहां वे सिलीगुड़ी कॉरिडोर और नेपाल, भूटान व बांग्लादेश सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर उत्तर बंगाल पहुंच चुके हैं। एक महीने के भीतर यह उनका दूसरा उत्तर बंगाल दौरा है, जो पूर्वी सीमा की सुरक्षा के प्रति केंद्र सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर के साथ-साथ नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा करना है और गृह मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे देश का चिकन नेक भी कहा जाता है, भारत की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। यह गलियारा देश के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र महत्वपूर्ण स्थलीय कड़ी है और इसके भौगोलिक परिवेश में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं बेहद करीब हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यहां सुरक्षा में होने वाली कोई भी चूक केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर पूर्वोत्तर भारत की सैन्य, नागरिक और आर्थिक संपर्क व्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमित शाह के सुरक्षा एजेंडे में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा सर्वोपरि है।

बहुस्तरीय सुरक्षा और तकनीकी निगरानी पर जोर

पूर्वी सीमा पर केंद्र सरकार का ध्यान अब केवल घुसपैठ रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर है। इस रणनीति का उद्देश्य अवैध घुसपैठ के साथ-साथ हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों की आवाजाही, मानव तस्करी और सीमा पार होने वाले अन्य अपराधों पर लगाम लगाना है। संवेदनशील इलाकों में किसी भी असामान्य गतिविधि का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए तकनीकी निगरानी प्रणालियों को और मजबूत किया जा रहा है। गृह मंत्रालय की सीमा प्रबंधन नीति के तहत सीमा पर बाड़ लगाने, सड़कों का निर्माण करने और सीमा चौकियों को तकनीकी प्रणालियों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है ताकि एक एकीकृत सुरक्षा ढांचा तैयार हो सके।

दौरे का कार्यक्रम और उच्चस्तरीय बैठकें

बागडोगरा हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद अमित शाह सुकना के लिए रवाना हुए। उनके तीन दिवसीय कार्यक्रम में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों के साथ संवाद और सुरक्षा परियोजनाओं की समीक्षा शामिल है और 21 अगस्त को वे सशस्त्र सीमा बल के सीमांत मुख्यालय में सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 22 अगस्त को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में खुफिया सूचनाओं के साझा इस्तेमाल और केंद्र व राज्य की एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की जाएगी।

आंकड़ों में पूर्वी सीमा की सुरक्षा स्थिति

अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग से लेकर सिलीगुड़ी तक पूर्वी भारत का सुरक्षा परिदृश्य कई परतों में फैला हुआ है और इस क्षेत्र में तीन देशों की सीमाएं और आठ राज्यों की कनेक्टिविटी जुड़ी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश की सीमा पर अब तक 1647 दशमलव 696 किलोमीटर लंबी बाड़ लगाई जा चुकी है। सुरक्षा रणनीति में इस बाड़ के साथ-साथ सीमा सड़कों और चौकियों का जाल बिछाना शामिल है। सरकार का लक्ष्य 1647 दशमलव 696 किलोमीटर के इस पूरे क्षेत्र में तकनीकी निगरानी और भौतिक अवरोधों के माध्यम से एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करना है, जिससे सीमा पार अपराधों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।