संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज बुधवार को 40 खरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह बढ़ते हुए वित्तीय दबाव का एक गंभीर संकेत भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान देश के राष्ट्रीय कर्ज को पूरी तरह खत्म करने का वादा किया था, लेकिन हकीकत इसके विपरीत रही और कर्ज में लगातार बढ़ोतरी होती गई। अब उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान यह कर्ज उनके पहले कार्यकाल के मुकाबले करीब दोगुना हो चुका है। इस बढ़ते कर्ज ने अमेरिकी सरकार के सामने अपने खर्चों और आय के बीच संतुलन बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ईरान युद्ध और सैन्य खर्च का वित्तीय बोझ
अमेरिकी कर्ज में इस भारी बढ़ोतरी के पीछे कई पुराने और नए कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। इनमें लंबे समय से चला आ रहा भारी सैन्य खर्च, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर होने वाला बढ़ता खर्च प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में लागू की गई टैक्स कटौतियों ने भी सरकारी राजस्व पर भारी दबाव डाला है। ईरान युद्ध और उससे जुड़े सैन्य अभियानों ने इस वित्तीय बोझ को और अधिक बढ़ा दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकेले इस साल अमेरिका को अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए 2 खरब डॉलर से ज्यादा का नया कर्ज लेना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुल घाटे का करीब आधा हिस्सा उन निवेशकों को ब्याज देने में खर्च हो रहा है जिनसे सरकार ने कर्ज लिया है।
ब्याज का बढ़ता बोझ और कर्ज का जाल
जैसे-जैसे कुल कर्ज बढ़ता जा रहा है, उसके साथ जुड़ा ब्याज भी सरकार के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। पुराने कर्ज पर निवेशकों को नियमित रूप से ब्याज देना पड़ता है और कर्ज की राशि बढ़ने के साथ-साथ यह खर्च भी बढ़ता जाता है। इस स्थिति के कारण सरकार के पास अन्य जरूरी विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धन सीमित हो सकता है। कमेटी फॉर ए रिस्पांसिबल फेडरल बजट के वरिष्ठ नीति निदेशक मार्क गोल्डवेन ने इस स्थिति पर चेतावनी दी है और उनके अनुसार, अमेरिका कर्ज के जाल में फंसता हुआ नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नीति निर्माताओं द्वारा कर्ज कम करने में दिखाई जा रही असमर्थता देश के लिए लंबे समय का आर्थिक जोखिम बढ़ा रही है।
सरकारी दक्षता विभाग और खर्च में कटौती की चुनौती
सत्ता में वापसी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सरकारी खर्चों में कटौती करने के उद्देश्य से एलन मस्क के नेतृत्व में एक विशेष सरकारी दक्षता विभाग का गठन किया था। इस विभाग का मुख्य लक्ष्य सरकारी खर्चों में 1 खरब डॉलर तक की बड़ी कटौती करना निर्धारित किया गया था। हालांकि, उपलब्ध विवरणों के अनुसार, यह विभाग बचत के मामले में अभी तक अपेक्षित परिणाम हासिल करने में सफल नहीं हो सका है और स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि चुनाव नजदीक आने के कारण सरकार के लिए बड़े और कड़े वित्तीय फैसले लेना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में खर्च घटाने और कर्ज को नियंत्रित करने की समस्या लगातार बनी हुई है।
अमेरिकी सरकार कैसे जुटाती है कर्ज?
अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिकी सरकार सरकारी बॉन्ड और नोट्स जैसे विभिन्न वित्तीय साधनों की बिक्री करती है। जब सरकार का कुल खर्च उसके टैक्स से प्राप्त होने वाले राजस्व से अधिक हो जाता है, तब उसे निवेशकों से कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ती है। अमेरिकी वित्त विभाग इन प्रतिभूतियों के माध्यम से बाजार से पैसा जुटाता है। इसका अर्थ यह है कि अमेरिका का अधिकांश कर्ज उन निवेशकों और संस्थानों से आता है जो उसके सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का इस मामले में तर्क है कि वर्तमान में लिया जा रहा यह कर्ज भविष्य में उत्पादक साबित होगा। हालांकि, बाजार के विशेषज्ञों और निवेशकों के बीच इस रणनीति को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है।
टैक्स कटौती और राजस्व का संकट
अमेरिकी सरकार के राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है और लेकिन वर्ष 2025 में लागू की गई टैक्स कटौतियों के कारण सरकार को मिलने वाले राजस्व में कमी आई है। दूसरी ओर, सरकारी खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस वित्तीय अंतर को पाटने के लिए सरकार को पहले से कहीं ज्यादा कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर होने वाला खर्च भी वित्तीय दबाव को बढ़ा रहा है और सरकार के सामने अब एक तरफ आम नागरिकों और व्यापारियों पर टैक्स का बोझ कम रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ बढ़ते घाटे और कर्ज को नियंत्रित करने का भारी दबाव है।
टैरिफ योजना और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के माध्यम से सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की एक विस्तृत योजना तैयार की थी। लेकिन प्राप्त विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को अवैध करार दे दिया। इस अदालती फैसले के बाद अमेरिका को विभिन्न कंपनियों को करीब 160 अरब डॉलर की राशि वापस करनी पड़ी। इससे सरकार की राजस्व बढ़ाने की योजना को एक बड़ा झटका लगा है और वहीं दूसरी ओर, सैन्य अभियानों, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य योजनाओं और पुराने कर्ज पर ब्याज का खर्च लगातार बना हुआ है। संक्षेप में, अमेरिकी सरकार के सामने एक साथ दोहरी समस्या खड़ी है: एक तरफ खर्च बढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ आय के स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है।
