अमेरिका पर कर्ज का ऐतिहासिक बोझ: पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा आंकड़ा

अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। पिछले 10 वर्षों से भी कम समय में यह कर्ज दोगुना हो गया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता और बढ़ते वित्तीय घाटे को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका अब एक ऐसे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल सरकारी कर्ज इतिहास में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। मंगलवार को अमेरिका का कुल कर्ज 40 ट्रिलियन और 47 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इतनी बड़ी रकम ने अमेरिका की आर्थिक स्थिति और बढ़ते वित्तीय घाटे को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने अपने बढ़ते खर्च और कर्ज पर जल्द ही काबू नहीं पाया, तो देश के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

कर्ज का पूरा विवरण

अमेरिकी सरकार के कुल कर्ज को अगर विस्तार से देखें, तो इसमें करीब 32 ट्रिलियन और 260 अरब डॉलर वह कर्ज है जो आम निवेशकों और संस्थानों के पास मौजूद अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के रूप में है। इसे सार्वजनिक कर्ज कहा जाता है। वहीं, करीब 7 ट्रिलियन और 782 अरब डॉलर का कर्ज सरकार की अलग-अलग संस्थाओं के बीच मौजूद है, जिसे अंतर-सरकारी कर्ज माना जाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था किस हद तक उधार ली गई पूंजी पर टिकी हुई है।

10 साल से भी कम समय में कर्ज हुआ दोगुना

अमेरिका का कर्ज जिस तेजी से बढ़ा है, वह दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बना हुआ है। जनवरी 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज करीब 19 ट्रिलियन और 950 अरब डॉलर था। अब यह बढ़कर 40 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो गया है। इसका मतलब है कि पिछले 10 साल से भी कम समय में अमेरिकी कर्ज दोगुना हो गया है। इस भारी बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा कोरोना महामारी के दौरान सरकार की ओर से किए गए भारी खर्च से जुड़ा है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ढहने से बचाने, लोगों की मदद करने और कारोबारों को सहारा देने के लिए अमेरिका ने बड़े पैमाने पर कर्ज लिया था। इसमें डोनाल्ड ट्रंप और उनके बाद राष्ट्रपति बने जो बाइडेन, दोनों के कार्यकाल में बड़े खर्च किए गए।

कर्ज बढ़ने के अन्य प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ कोरोना महामारी को ही बढ़ते कर्ज के लिए पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लंबे समय से अमेरिका में सरकारी खर्च और टैक्स से होने वाली आय के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है। सरकार की टैक्स कटौती की नीतियों और लगातार बढ़ते सरकारी खर्च ने भी इस कर्ज को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आय कम और खर्च ज्यादा होने की वजह से सरकार को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बार-बार कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।

ब्याज का बढ़ता बोझ और बजट पर असर

अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसे हर साल अपने कर्ज पर भारी रकम ब्याज के रूप में चुकानी पड़ रही है और वर्तमान में अमेरिकी सरकार के कुल सालाना खर्च में करीब 1 ट्रिलियन और 100 अरब डॉलर सिर्फ कर्ज के ब्याज के भुगतान में जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 में एक ऐतिहासिक स्थिति तब बनी जब अमेरिका का कर्ज चुकाने का खर्च उसके रक्षा विभाग यानी पेंटागन के कुल बजट से भी ज्यादा हो गया। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026 के पहले 10 महीनों में ब्याज का खर्च मेडिकेयर पर होने वाले खर्च से भी आगे निकल गया। अब यह सोशल सिक्योरिटी के बाद संघीय बजट का दूसरा सबसे बड़ा खर्च बन गया है। अमेरिका में बुजुर्गों के लिए सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है क्योंकि देश की आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।

ट्रंप और बाइडेन के कार्यकाल का तुलनात्मक अध्ययन

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका का सरकारी कर्ज करीब 7 ट्रिलियन और 800 अरब डॉलर बढ़ा था। इसमें कोरोना महामारी के दौरान हुआ आपातकालीन खर्च भी शामिल था। इसके बाद जो बाइडेन के कार्यकाल में सरकारी कर्ज में करीब 8 ट्रिलियन और 400 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। बाइडेन के कार्यकाल में कोरोना के बाद दी गई आर्थिक मदद के अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी और अन्य सामाजिक योजनाओं पर बड़ा खर्च किया गया और डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की बात करें तो जनवरी 2025 से अब तक अमेरिका का कर्ज करीब 3 ट्रिलियन और 800 अरब डॉलर बढ़ चुका है। अगर दोनों कार्यकालों को मिला दिया जाए, तो ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान कर्ज में कुल बढ़ोतरी करीब 11 ट्रिलियन और 600 अरब डॉलर बताई गई है। हालांकि ट्रंप की दूसरी सरकार ने खर्च कम करने के दावे किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन योजनाओं में जाता है जिनमें तुरंत कटौती करना संभव नहीं है, जैसे सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर, मेडिकेड और पूर्व सैनिकों को दी जाने वाली सुविधाएं।

आर्थिक संकट की चेतावनी

बजट पर नजर रखने वाले विभिन्न संगठनों ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपनी आय और खर्च के बीच संतुलन नहीं बनाया, तो आने वाले समय में एक गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं। उसे या तो टैक्स से मिलने वाली आय को बढ़ाना होगा या फिर अपने खर्चों में भारी कटौती करनी होगी। अमेरिका के इस बढ़ते कर्ज का असर सिर्फ वहां की सरकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई, ब्याज दरों और आम जनता के लिए कर्ज की लागत पर भी पड़ सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।