पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर न्यायपालिका के साथ टकराव का रास्ता चुन लिया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से निकालकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। सरकार का तर्क है कि इमरान खान को जेल से बाहर लाने पर देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और अन्य कैदी भी इसी तरह की मांग करने लगेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश और सरकार की दलील
मंगलवार को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि 3 साल से जेल में बंद इमरान खान को 48 घंटे के भीतर इस्लामाबाद के शिफा अस्पताल में भर्ती कराया जाए। चीफ जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट किया था कि इमरान खान की सेहत ठीक नहीं है और बेहतर इलाज पाना उनका बुनियादी हक है। लेकिन बुधवार को शहबाज शरीफ की सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। सरकार ने अदालत में दलील दी कि इमरान खान को अस्पताल शिफ्ट करने से अराजकता फैल सकती है। मंत्रियों का कहना है कि अगर एक कैदी को ऐसी सुविधा दी गई, तो जेल में बंद हजारों अन्य कैदी भी अस्पताल जाने की मांग करेंगे।
मेडिकल रिपोर्ट पर विवाद और सरकार की चालाकी
अदालती कार्यवाही के दौरान यह बात सामने आई कि सरकार ने इमरान खान की जो मेडिकल रिपोर्ट पेश की थी, वह अधूरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने का आदेश दिया था। सरकार के मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई इस मुद्दे को सियासी रंग दे रही है। सूचना मंत्री अताउल्लाह तराड ने कहा कि इमरान खान के समर्थकों को खुश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि उनके ख्वाब कभी पूरे नहीं होंगे। वहीं गृह मंत्री तलाल चौधरी ने इसे एक इमोशनल कार्ड करार दिया। उन्होंने कहा कि इमरान खान को अदालत ने सजा दी है, इसलिए उन्हें कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया जा सकता।
परिवार से मुलाकात और पाबंदियां
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दबाव में सरकार ने इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी को जेल में उनसे मिलने की इजाजत दी। 9 महीने के लंबे अंतराल के बाद बुधवार को नूरीन नियाजी ने अडियाला जेल में अपने भाई से 15 मिनट तक मुलाकात की। इसी दौरान इमरान खान की मुलाकात उनकी पत्नी बुशरा बेगम से भी कराई गई, जो उसी जेल की दूसरी बैरक में बंद हैं। हालांकि, सरकार ने इमरान की अन्य दो बहनों, अलीमा और उज्मा खान को जेल में प्रवेश नहीं दिया, जिससे समर्थकों में भारी नाराजगी है और कोर्ट ने शर्त रखी थी कि परिवार का कोई भी सदस्य मुलाकात के बाद मीडिया से बात नहीं करेगा, इसलिए नूरीन नियाजी चुपचाप जेल से बाहर निकल गईं।
विपक्ष और मौलानाओं का कड़ा रुख
इमरान खान के वकील सलमान अकरम राजा ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक कोर्ट का नया फैसला नहीं आता, तब तक 48 घंटे वाली समयसीमा का पालन करना अनिवार्य है। पीटीआई के चेयरमैन ने कहा कि इमरान खान 1000 दिन से जेल में हैं और सरकार उनके बाहर आने से डर रही है। इस मुद्दे पर धार्मिक नेताओं ने भी सरकार को घेरा है। शिया मौलाना अल्लामा नासिर अब्बास और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के मौलाना फजल-उर-रहमान ने शहबाज शरीफ को नसीहत दी है कि किसी की सेहत के साथ राजनीति करना ठीक नहीं है। यहां तक कि सरकार की सहयोगी पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने भी कहा कि इमरान खान की सेहत से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और सरकार को यह मामला पहले ही सुलझा लेना चाहिए था ताकि उन्हें जनता की सहानुभूति न मिले।
