भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म CLSA ने इस सेक्टर के कई दिग्गज शेयरों पर अपनी रेटिंग घटा दी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर बढ़ती चिंताओं और इसके कारण भविष्य में होने वाले बदलावों को देखते हुए ब्रोकरेज ने यह कदम उठाया है। CLSA का मानना है कि एआई के कारण होने वाले बदलावों का असर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल है। हालांकि, इस नकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद बुधवार को बाजार में आईटी शेयरों ने मजबूती दिखाई और निफ्टी आईटी इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करता नजर आया।
रेटिंग में बड़ी कटौती और संरचनात्मक चिंताएं
CLSA ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि पहली तिमाही के नतीजे भारतीय आईटी कंपनियों और उनके वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के लिए मिले-जुले रहे हैं। ब्रोकरेज के अनुसार, एआई के कारण आने वाले समय में वॉल्यूम और डिफ्लेशन के बीच का संतुलन बिगड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई वॉल्यूम वित्त वर्ष 2030 तक डिफ्लेशन को पीछे छोड़ सकता है, जिसका सीधा असर कंपनियों की डॉलर रेवेन्यू ग्रोथ पर पड़ेगा। इसके कारण रेवेन्यू ग्रोथ कम से मध्यम सिंगल डिजिट में सिमट सकती है। इन्हीं संरचनात्मक चिंताओं और लंबे समय तक चलने वाले बदलावों को देखते हुए CLSA ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों की रेटिंग को घटाकर होल्ड कर दिया है।
विप्रो और एम्फैसिस पर सबसे ज्यादा खतरा
ब्रोकरेज फर्म ने विप्रो और एम्फैसिस के शेयरों को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन दोनों कंपनियों की रेटिंग को घटाकर अंडरपरफॉर्म कर दिया गया है और cLSA के विश्लेषण के अनुसार, विप्रो के शेयरों में बड़ी गिरावट आ सकती है। ब्रोकरेज ने विप्रो के लिए अपने अनुमान को 157 रुपये प्रति शेयर से घटाकर 152 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। यदि पिछले क्लोजिंग प्राइस 178 रुपये प्रति शेयर से तुलना की जाए, तो इस शेयर में 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना है। इसी तरह, एम्फैसिस के लिए 2113 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया गया है, जिसका मतलब है कि इस शेयर में भी 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी जा सकती है।
इंफोसिस और टीसीएस के टारगेट प्राइस में बदलाव
रेटिंग घटाने के बावजूद, बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए CLSA ने कुछ शेयरों के टारगेट प्राइस में मामूली बढ़ोतरी की है। इंफोसिस के लिए टारगेट प्राइस को 1109 रुपये प्रति शेयर से बढ़ाकर 1147 रुपये प्रति शेयर कर दिया गया है। यह नया टारगेट प्राइस पिछले बंद भाव 1115 रुपये प्रति शेयर से लगभग 3 प्रतिशत ऊपर है। वहीं, टीसीएस के लिए टारगेट प्राइस 2165 रुपये प्रति शेयर से बढ़ाकर 2326 रुपये प्रति शेयर किया गया है, जो कि 2 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है। टेक महिंद्रा के लिए ब्रोकरेज ने 1634 रुपये प्रति शेयर का पुराना टारगेट प्राइस ही बरकरार रखा है, जो मौजूदा कीमत से 3 प्रतिशत ऊपर जाने की संभावना दिखाता है।
मिड-टियर आईटी कंपनियों पर ब्रोकरेज का भरोसा
बड़े शेयरों पर सावधानी बरतने के साथ ही CLSA मिड-टियर आईटी कंपनियों को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि मध्यम आकार की आईटी कंपनियां इन बड़े बदलावों का फायदा उठाने के लिए बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि उनके पास कुशल मैनेजमेंट और बेहतर क्रियान्वयन क्षमता है। इसी कारण CLSA ने कोफोर्ज और परसिस्टेंट सिस्टम्स पर अपनी हाई कन्विक्शन आउटपरफॉर्म रेटिंग को बरकरार रखा है। इसके अलावा, एलटीआई माइंडट्री और हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज पर भी आउटपरफॉर्म रेटिंग जारी रखी गई है, जो यह संकेत देता है कि निवेशकों के लिए मिड-कैप आईटी स्पेस में बेहतर अवसर हो सकते हैं।
बाजार की प्रतिक्रिया और टॉप गेनर्स
ब्रोकरेज की डाउनग्रेड रिपोर्ट के बावजूद बुधवार सुबह आईटी शेयरों ने शानदार वापसी की। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 30560 के स्तर को पार कर गया और सेक्टोरल गेनर्स की सूची में सबसे ऊपर रहा। कोफोर्ज, परसिस्टेंट सिस्टम्स और एचसीएल टेक के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की उछाल देखी गई। एलटीआई माइंडट्री, इंफोसिस और विप्रो के शेयर भी लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं, एम्फैसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फिलहाल बाजार ने ब्रोकरेज की चिंताओं को दरकिनार कर खरीदारी पर ध्यान केंद्रित किया है।
