बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल गिरफ्तार, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

बद्रीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तराखंड पुलिस ने बीकेटीसी के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में आरोपों के सही पाए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर मचे भारी बवाल के बीच उत्तराखंड पुलिस ने पहली बड़ी गिरफ्तारी की है। पुलिस ने जांच के आधार पर मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। प्रमोद नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के निलंबित कर्मचारी हैं। प्रारंभिक जांच में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों को पहली नजर में सही पाए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को और तेज कर दिया है। यह मामला उत्तराखंड के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक की प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा था।

पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ

चमोली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुरजीत सिंह पंवार ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। एसएसपी सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि चमोली पुलिस ने रविवार रात प्रमोद नौटियाल को उनके आवास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें तुरंत बद्रीनाथ ले जाया गया, जहां पुलिस उनसे गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है और चोरी किए गए चढ़ावे का प्रबंधन किस प्रकार किया जा रहा था।

आरोपी का प्रोफाइल और एफआईआर

प्रमोद नौटियाल का मंदिर प्रशासन में काफी प्रभाव रहा है और वह बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके खिलाफ मंगलवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई थी। मंदिर समिति ने विवाद बढ़ने और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया था। पुलिस अब उनके कार्यकाल के दौरान हुए अन्य वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस तरह की अनियमितताएं लंबे समय से चल रही थीं।

जांच समितियों का गठन

बीकेटीसी एक वैधानिक संस्था है, जो बद्रीनाथ मंदिर सहित उत्तराखंड के अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बीकेटीसी ने एक 4 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोप पहली नजर में सही प्रतीत होते हैं और इस मामले को लेकर उत्तराखंड सरकार भी पूरी तरह से सख्त नजर आ रही है। राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह अपनी ओर से एक 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति के अध्यक्ष गढ़वाल मंडल आयुक्त हैं। यह समिति अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और भविष्य के लिए जरूरी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया, जब बद्रीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोप सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इसके बाद भैरव सेना नामक एक संगठन ने इस पर कड़ा रुख अपनाया और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और अंततः प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी हुई और वर्तमान में पुलिस और प्रशासन मंदिर की दान गणना प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।