भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। नई दिल्ली में पदभार संभालने वाले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने स्वयं इस बात की जानकारी दी है कि 13 जनवरी को इस डील पर बात बन सकती है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ। दरों और बाजार पहुंच को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। इस संभावित सफलता से दोनों पक्षों की ओर से अपनी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।
राजदूत गोर का आशावादी दृष्टिकोण
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों की मूलभूत शक्ति पर जोर दिया, इसे सच्ची दोस्ती पर आधारित बताया। उनके बयानों में मौजूदा व्यापार विवादों के समाधान को लेकर गहरा आशावाद झलका। गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि "सच्चे दोस्तों" के बीच कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ये केवल विचारों के मतभेद होते हैं, मन के नहीं, जिसका अर्थ है कि एक साझा सद्भावना है जो संघर्ष समाधान को सुविधाजनक बनाती है और यह कूटनीतिक रूपरेखा बताती है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में निहित जटिलताओं के बावजूद, प्रधान मंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों ही आम सहमति खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजदूत का यह बयान एक शक्तिशाली संकेत के रूप में कार्य करता है कि 13 जनवरी को होने वाली बातचीत के अगले दौर से ठोस परिणाम मिलने की उम्मीद है, जिससे लंबे समय से चल रही वार्ताओं का अंत हो सकता है।
पैक्ससिलिका पहल: एक नई रणनीतिक साझेदारी
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण बाधा टैरिफ का मुद्दा रहा है। इससे पहले, अमेरिकी संसद ने भारत पर 500% का भारी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पारित किया था, इस। कदम की स्वाभाविक रूप से कड़ी आलोचना हुई थी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसका जोरदार जवाब दिया था। इस विवादास्पद प्रस्ताव ने व्यापार वार्ताओं पर एक छाया डाल दी थी, जिससे बाजार पहुंच और व्यापार बाधाओं पर मतभेदों की गहराई उजागर हुई थी और हालांकि, राजदूत गोर के हालिया बयान आशा की किरण प्रदान करते हैं कि इन टैरिफ से संबंधित मुद्दों को आगामी वार्ताओं में संबोधित किया जाएगा और संभवतः हल किया जाएगा। दोनों देशों के बीच "किसी भी उलझन" को सुलझाने पर उनका जोर सीधे तौर पर इन संवेदनशील आर्थिक मामलों को सीधे संबोधित करने के इरादे की ओर इशारा करता है, जिसका लक्ष्य अधिक न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार ढांचे के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। 500% टैरिफ लागू होगा या अधिक अनुकूल समाधान तक पहुंचा जाएगा, इस पर आगामी निर्णय चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
तत्काल व्यापार समझौते से परे, राजदूत गोर ने पैक्ससिलिका नामक एक महत्वपूर्ण नई। रणनीतिक पहल पर भी प्रकाश डाला, जिसे अमेरिका ने पिछले महीने शुरू किया था। उन्होंने यह घोषणा करते हुए खुशी व्यक्त की कि भारत को अगले महीने पैक्ससिलिका में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। पैक्ससिलिका को एक अमेरिकी नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल के रूप में वर्णित किया गया है, जिसे एक सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसका दायरा व्यापक है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा स्रोत, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य कच्चे माल से लेकर उन्नत प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स। तक पूरी सिलिकॉन वैल्यू चेन में साझेदार देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। यह सहयोगात्मक प्रयास एक महत्वपूर्ण वैश्विक उद्योग में लचीलापन और सुरक्षा बनाने का प्रयास करता है।
गोर ने पैक्ससिलिका के भीतर मौजूदा साझेदारियों पर भी विस्तार से बताया, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इज़राइल पिछले महीने शामिल हुए थे। उन्होंने जोर दिया कि भारत का इसमें शामिल होना इस बढ़ते समूह को काफी मजबूत करेगा। राजदूत ने पुष्टि की कि पैक्ससिलिका ने पहले ही ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण। कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर और इज़राइल के साथ साझेदारी स्थापित कर ली है। इस पहल और इसकी प्रारंभिक साझेदारियों की औपचारिक घोषणा वाशिंगटन डीसी में आयोजित पैक्ससिलिका शिखर सम्मेलन में की गई थी। भारत की संभावित सदस्यता वैश्विक प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क में इसके बढ़ते रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।
सकारात्मक बाजार प्रतिक्रिया
भारत के वित्तीय बाजारों ने व्यापार समझौते के संबंध में राजदूत गोर की आशावादी घोषणाओं पर लगभग तुरंत और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और भारतीय इक्विटी बाजार एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा था, जिसमें लगातार छह दिनों तक गिरावट देखी गई थी। सोमवार को, बाजार में शुरू में एक महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई, जिसमें बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स लगभग 700 अंक गिर गया था। हालांकि, अमेरिकी राजदूत के व्यापार समझौते पर सकारात्मक बयान के तुरंत बाद भावना में नाटकीय रूप से बदलाव आया। थोड़े समय के भीतर, बाजार ने दिन की शुरुआत में खोए हुए पूरे 700 अंकों की वसूली कर ली। यह त्वरित बदलाव भू-राजनीतिक विकास के प्रति बाजार की संवेदनशीलता और। अनुकूल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी उच्च उम्मीदों को उजागर करता है। रिपोर्ट लिखे जाने तक, सेंसेक्स लगभग 63 अंकों की बढ़त के साथ 83,638. 45 पर कारोबार कर रहा था, जो एक अंतिम व्यापार समझौते की संभावनाओं से प्रेरित निवेशक विश्वास को दर्शाता है। बाजार से यह तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया आगामी समझौते के आर्थिक महत्व और इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को होने वाले संभावित लाभों को रेखांकित करती है।