दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला हर्ष फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें एक महिला डॉक्टर की जान चली गई थी। सजा के साथ-साथ अदालत ने विधायक पर 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला समाज में हथियारों के दुरुपयोग और लापरवाही के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय सुनाया।
घटना का विवरण और अदालती कार्यवाही
यह दुखद घटना दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में एक फार्महाउस पर नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पार्टी के दौरान हुई थी। आरोप था कि विधायक राजू सिंह ने जश्न के दौरान हवा में गोलियां चलाई थीं, जिनमें से एक गोली डॉक्टर अर्चना गुप्ता को जा लगी। इस चोट के कारण बाद में उनकी मृत्यु हो गई। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 6 जून को राजू सिंह को दोषी करार दिया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (II) यानी गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी पाया था। कोर्ट ने माना कि राजू सिंह ने ही वह जानलेवा गोली चलाई थी जिससे डॉक्टर गुप्ता की मौत हुई थी।
बचाव पक्ष की दलीलें और वैज्ञानिक तर्क
सजा पर सुनवाई के दौरान राजू सिंह के वकील राजीव मोहन ने अदालत के सामने अजीबोगरीब तर्क दिए और उन्होंने कहा कि विधायक ने वैज्ञानिक जानकारी की कमी के कारण यह जुर्म किया क्योंकि वह गोली के पैराबोलिक रास्ते का अंदाजा नहीं लगा सके थे। वकील ने दलील दी, "मैंने वैज्ञानिक जानकारी की कमी के कारण गोली चलाई.. और यह लापरवाही का मामला है। " उन्होंने यह भी कहा कि विधायक ने न तो जमीन पर निशाना लगाया और न ही छत पर लोग थे, इसलिए इसे नैतिक रूप से बुरा काम नहीं माना जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने सजा को 2 साल से कम रखने की अपील की थी ताकि विधायक की सदस्यता पर आंच न आए।
प्रोबेशन की मांग और विधायक का पछतावा
विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने प्रोबेशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राजू सिंह को पहले किसी अन्य मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना के बाद विधायक की पत्नी और बच्चे पीड़ित डॉक्टर को अपनी ही कार में अस्पताल ले गए थे, जो उनके गहरे दुख और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है। राजू सिंह ने खुद भी अदालत से सुधार का मौका मांगते हुए कहा कि उन्हें इस घटना पर गहरा अफसोस है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके खिलाफ कई राजनीतिक मामले हैं, लेकिन कभी भी हथियार लहराने या हवा में गोली चलाने का आरोप नहीं लगा है।
अदालत का फैसला और अन्य आरोपियों की रिहाई
अदालत ने विधायक की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें 4 साल की जेल और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद राजू सिंह को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। वह फरवरी 2019 से इस मामले में जमानत पर बाहर थे। इसी मामले में अदालत ने विधायक की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य लोगों को बड़ी राहत दी है। उन्हें सबूत मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया गया है, क्योंकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। यह मामला सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा हथियारों के गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल पर एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर पेश करता है।
