राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले सीजेआई सूर्यकांत का बयान, कहा सबके लिए खुले हैं अदालत के दरवाजे

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात की मांग पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं, लेकिन कुछ प्रशासनिक और कानूनी कारणों से मुलाकात संभव नहीं हो पाई।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर किए जाने वाले मार्च से पहले मीडिया को संबोधित किया। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राहुल गांधी को पहले ही उस पत्र का जवाब दे दिया था जिसमें मुलाकात की मांग की गई थी। उन्होंने उन कारणों का विस्तार से उल्लेख किया जिनकी वजह से वह मुलाकात करने में असमर्थ थे। सीजेआई सूर्यकांत ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और न्यायपालिका हर नागरिक के लिए सुलभ है, चाहे वह आम आदमी हो या किसी निर्वाचित निकाय का सदस्य।

मुलाकात के अनुरोध पर सीजेआई का स्पष्टीकरण

मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया को बताया कि उन्हें कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र प्राप्त हुआ था और उन्होंने कहा कि मैंने कल रात ही उस पत्र का जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा। सीजेआई ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का अदालत में स्वागत है। उनके अनुसार, हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अदालत उनकी चिंताओं को सुनेगी और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह किया जाएगा।

'वन नेशन वन इलेक्शन' और हितों के टकराव पर बयान

'वन नेशन वन इलेक्शन' पर जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) के सुप्रीम कोर्ट दौरे के रद्द होने के संबंध में भी सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में तुलनात्मक रूप से ज्यादा कारण थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस मुद्दे यानी 'वन नेशन वन इलेक्शन' जेपीसी बैठक के मामले में कोर्ट में हितों के टकराव की संभावना थी। इसी कारण से न्यायपालिका को इसके प्रशासनिक पहलू पर गहराई से चर्चा करनी पड़ी। सीजेआई ने बताया कि उनके सीनियर न्यायिक सहयोगियों और उनकी यह सामूहिक राय थी कि उन्हें हितों के टकराव की किसी भी स्थिति से बचना चाहिए ताकि न्यायपालिका की निष्पक्षता बनी रहे।

राहुल गांधी से मिलने से इनकार के पीछे का तर्क

इससे पहले रविवार देर रात सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई थी कि सीजेआई सूर्यकांत ने 'वोट चोरी' के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। इसका मुख्य कारण यह बताया गया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। न्यायिक मर्यादा के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश उन विषयों पर राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल सकते जो अदालत में लंबित हैं। सीजेआई ने अपने बयान में भी इसी बात का संकेत दिया कि कानूनी प्रक्रिया ही किसी भी शिकायत के निवारण का सही मार्ग है।

विपक्ष की मांगें और ज्ञापन का विवरण

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेता उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे जिसमें कई गंभीर मांगें शामिल थीं। इन मांगों में 'वोट चोरी' को रोकने के उपाय, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को तत्काल रोकने और चुनाव के लिए पुनः मतपत्र यानी बैलेट पेपर प्रणाली पर लौटने की मांग की गई थी। हालांकि, सीजेआई ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक और कानूनी कारणों से यह मुलाकात संभव नहीं है, लेकिन अदालत के दरवाजे कानूनी याचिकाओं के लिए हमेशा खुले हैं।