Uttar Pradesh News / CM योगी का यूपी की जनता को बड़ा संदेश: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साइबर अपराधों के प्रति जनता को आगाह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। सीएम योगी ने लोगों से सतर्क रहने, अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने और साइबर अपराध होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करने की अपील की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है और उन्होंने अपनी विशेष चिट्ठी 'योगी की पाती' और अपने आधिकारिक X हैंडल के माध्यम से नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे भ्रामक शब्दों से सावधान रहने की अपील की है, यह स्पष्ट करते हुए कि देश के किसी भी कानून में ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल और कंप्यूटर ने जहां जीवन को सुगम बनाया है,। वहीं साइबर अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, जिनके खिलाफ सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र हैं।

'डिजिटल अरेस्ट' की सच्चाई: एक बड़ा भ्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रही धोखाधड़ी को लेकर जनता को विशेष रूप से आगाह किया है। उन्होंने बताया कि अपराधी 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे झूठे और भ्रामक शब्दों का प्रयोग कर निर्दोष नागरिकों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं और यह एक ऐसी कपटपूर्ण रणनीति है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल, वॉट्सऐप या सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को गिरफ्तार करने की धमकी देते हैं और उनसे तुरंत पैसे की मांग करते हैं। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है और पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, वॉट्सऐप, या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है और यह जानकारी साइबर ठगों के जाल में फंसने से बचने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़े शस्त्र

मुख्यमंत्री ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों पर भी प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे, लेकिन आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त, सभी जनपदीय थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है, ताकि। नागरिकों को साइबर अपराध से संबंधित किसी भी समस्या में तत्काल सहायता मिल सके। यह विस्तार सरकार की साइबर सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश के हर कोने में साइबर अपराधों से लड़ने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा मौजूद हो।

इन प्रयासों का उद्देश्य साइबर अपराधियों पर नकेल कसना और जनता को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना है। सीएम योगी ने अपने संदेश में कहा कि साइबर ठगों के विरुद्ध सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र हैं। उन्होंने लोगों से जागरूक बनने और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की है, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को, जो अक्सर साइबर ठगों के आसान शिकार बन जाते हैं और जागरूकता का अर्थ है ऑनलाइन खतरों को पहचानना, संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करना, अज्ञात स्रोतों से आए ईमेल या संदेशों का जवाब न देना और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना। यह सक्रिय दृष्टिकोण ही हमें साइबर अपराधियों के चंगुल से बचा सकता है।

सोशल मीडिया के उपयोग में सावधानी

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आप जो तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उसके माध्यम से अपराधी। पहले आपके बारे में सूचनाएं जुटाते हैं और इन्हीं सूचनाओं को आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं। अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अपनी गोपनीयता सेटिंग्स को मजबूत रखना और अनावश्यक जानकारी साझा करने से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपराधियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग पहचान की चोरी, वित्तीय। धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों को जन्म दे सकता है।

साइबर अपराध होने पर क्या करें?

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सावधानी के बावजूद यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाता है, तो उसे क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें। जितना शीघ्र आप पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। यह हेल्पलाइन नंबर 24x7 उपलब्ध है और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करता है। समय पर रिपोर्टिंग से न केवल धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोका जा सकता है, बल्कि अपराधियों को पकड़ने में भी मदद मिलती है।

एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा, “आइए,। हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें। ” यह आह्वान प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को अपनी डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने और एक सामूहिक प्रयास के माध्यम से एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करता है। सरकार के प्रयासों और जनता की जागरूकता के समन्वय से ही उत्तर प्रदेश को साइबर अपराधों से मुक्त किया जा सकता है, जिससे सभी नागरिक डिजिटल युग के लाभों का सुरक्षित रूप से आनंद ले सकें।