अयोध्या महंत राजू दास का स्वामी प्रसाद मौर्य पर विवादित बयान, मैनपुरी में दी धमकी

अयोध्या के हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने मैनपुरी में एक सम्मेलन के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ विवादित टिप्पणी की। उन्होंने मौर्य के बयानों पर आपत्ति जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और उन पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन के दौरान अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ अत्यंत विवादित बयान दिया है। दिल्ली पब्लिक इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में महंत राजू दास ने मौर्य के हालिया बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि यदि वे साधु न होकर गृहस्थ होते, तो वे मौर्य के खिलाफ हिंसक कदम उठाने से पीछे नहीं हटते। इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

विवादित बयान और 'लाइसेंस' का जिक्र

सम्मेलन को संबोधित करते हुए महंत राजू दास ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम लोग संत हैं, इसलिए हमें माला जपनी पड़ रही है। " महंत ने आरोप लगाया कि मौर्य जानबूझकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं और उनके धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं और उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भी मौर्य का विरोध करने का आह्वान किया।

हिंदू और आतंकवाद के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया

महंत राजू दास ने स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा कथित तौर पर हिंदुओं को 'आतंकवादी' और 'नीच' कहे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मौर्य के शब्द इतने कटु होते हैं कि उन्हें सुनकर आंखों में आंसू आ जाते हैं और राजू दास के अनुसार, मौर्य हिंदुओं को अपमानित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा, "हम आतंकवादी नहीं हैं जो तलवार लेकर गला काट देंगे, हम सनातनी हैं। " उन्होंने मौर्य को चुनौती दी कि यदि उन्हें सनातन धर्म में विश्वास नहीं है, तो उन्हें तत्काल अपना नाम बदल लेना चाहिए।

स्वामी प्रसाद मौर्य का 'घूसखोर पंडत' पर रुख

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब स्वामी प्रसाद मौर्य पहले से ही अपनी टिप्पणियों के कारण चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'घूसखोर पंडत' का बचाव किया था। मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि इस फिल्म का ब्राह्मणों के अपमान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया था कि 'पंडित' शब्द का अर्थ विद्वान होता है और फिल्म के निर्माता व अभिनेता स्वयं ब्राह्मण हैं। मौर्य के इस रुख को लेकर भी धार्मिक संगठनों में असंतोष देखा गया था, जिसे महंत राजू दास ने अपने संबोधन में आधार बनाया।

विश्लेषकों के अनुसार राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में धर्म और राजनीति का टकराव एक बार फिर चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार पिछड़ों और दलितों की राजनीति को धार देने के लिए धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, धार्मिक गुरुओं द्वारा इस प्रकार के तीखे बयानों को अपनी आस्था की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक मंचों से हिंसा की भाषा का प्रयोग कानूनी जटिलताएं पैदा कर सकता है और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्षतः, महंत राजू दास के इस बयान ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक पक्ष इसे धार्मिक भावनाओं का उबाल मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध के बीच की मर्यादा का उल्लंघन बता रहा है। फिलहाल इस मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य या उनकी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक कानूनी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है।

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